
इतिहास बन गया घंटों का सफर
11,500 फीट से अधिक ऊंचाई वाले जोजिला दर्रे पर हर साल भारी बर्फबारी होती है। इसके चलते सर्दियों में श्रीनगर और लद्दाख के बीच सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है। सुरंग के निर्माण के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और दोनों क्षेत्रों के बीच पूरे साल आवागमन संभव हो सकेगा।
यह परियोजना बालटाल क्षेत्र को द्रास के मीनामर्ग से जोड़ेगी। इसके साथ ही पहले से संचालित जेड-मोड़ सुरंग और जोजिला सुरंग मिलकर लद्दाख के लिए एक मजबूत और सुरक्षित सड़क नेटवर्क तैयार करेंगी।
सुरंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लद्दाख तक जरूरी सामान और संसाधनों की आपूर्ति मौसम की मार से प्रभावित नहीं होगी। साथ ही सेना को भी सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। स्थानीय लोगों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए भी यह परियोजना राहत लेकर आएगी।
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वर्तमान में जोजिला दर्रे को पार करने में कई घंटे लग जाते हैं। सुरंग पूरी होने के बाद यह समय घटकर लगभग 15 मिनट रह जाएगा। इससे यात्रा न केवल आसान होगी, बल्कि ईंधन और समय दोनों की बचत होगी। फरवरी 2028 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होते ही लद्दाख की सड़क कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू होगा।
अब तक सोनमर्ग की खूबसूरती का मजा गर्मियों में ही लिया जा सकता था। सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते यह इलाका लगभग दुनिया से कट जाता था, लेकिन सुरंग के चालू होने के बाद ट्रेवल्स साल के बारहों महीने सोनमर्ग और थाजीवास ग्लेशियर की खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे।
जोजिला सुरंग का सफर यात्रियों के लिए किसी शानदार एक्सपीरिएंस से कम नहीं होगा। बर्फीले पहाड़ों के नीचे से गुजरते हुए लोग कुछ ही मिनटों में उस दूरी को तय कर सकेंगे, जिसे पार करने में पहले घंटों लग जाते थे। खराब मौसम और खतरनाक मोड़ों की चिंता भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
Location : Jammu/New Delhi
Published : 9 June 2026, 4:05 PM IST