अंतरिक्ष में भारत की नई ऐतिहासिक उड़ान; जानिए EOS-05 उपग्रह की सफल लॉन्च पर क्या बोले ISRO चीफ!

2021 की असफलता और 2025 के दो झटकों के बाद ISRO ने हासिल की बड़ी कामयाबी। आखिर EOS-05 भारत के लिए इतना खास क्यों है और कैसे यह भूतुल्यकालिक कक्षा से देश की इमेजिंग क्षमता को नई ताकत देगा?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 September 2026, 12:22 PM IST

Sriharikota: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शुक्रवार तड़के 2:55 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया। इस मौके पर ISRO प्रमुख वी. नारायणन समेत संगठन के कई पूर्व अध्यक्ष भी मौजूद रहे। मिशन की सफलता को भारत के पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के लिए अहम माना जा रहा है।

GSLV की 19वीं उड़ान में मिली सफलता

EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा गया। ISRO के मुताबिक यह GSLV की 19वीं उड़ान है। आधी रात के करीब तीन घंटे बाद हुए इस प्रक्षेपण के लगभग 22 मिनट बाद मिशन डायरेक्टर ने सफलता की घोषणा की। इसके साथ ही लंबे अंतराल के बाद GSLV कार्यक्रम ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।

भूतुल्यकालिक कक्षा से इमेजिंग की नई क्षमता

EOS-05 को अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के तौर पर विकसित किया गया है। इसे भूतुल्यकालिक कक्षा (Geosynchronous Orbit) से इमेजिंग करने वाला भारत का पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह बताया गया है। उपग्रह के परिचालन में आने के बाद इससे पृथ्वी की सतह से जुड़ा महत्वपूर्ण और रणनीतिक डेटा हासिल किया जा सकेगा।

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इसरो प्रमुख ने बताया मिशन का महत्व

प्रक्षेपण के बाद ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की अहमियत पर बात की। उन्होंने कहा कि जब EOS-05 कक्षा में पूरी तरह परिचालन में आ जाएगा, तब यह भारत का भूतुल्यकालिक कक्षा से पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह होगा। इससे देश को महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

2021 के असफल मिशन के बाद मिली बड़ी कामयाबी

EOS-05 मिशन को 2021 में असफल हुए GSLV-F10/EOS-03 मिशन के स्थान पर विकसित किया गया है। करीब पांच साल पहले हुए उस प्रयास में उड़ान भरने के लगभग 307 सेकंड बाद मिशन को रद्द करना पड़ा था। ISRO के अनुसार उस समय क्रायोजेनिक अपर स्टेज में आई तकनीकी समस्या के कारण मिशन सफल नहीं हो सका था।

2025 में भी दो मिशनों को लगा था झटका

EOS-05 की सफलता से पहले ISRO को हाल के वर्षों में कुछ मिशनों में असफलता का सामना करना पड़ा था। मई 2025 में PSLV-C61 के जरिए EOS-09 को अंतरिक्ष में भेजने का प्रयास विफल रहा था। ISRO के अनुसार मोटर केस के चैंबर प्रेशर में गिरावट इसकी वजह बनी थी।

PSLV-C62 भी पूरा नहीं कर पाया था मिशन

इसी साल 16 उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ PSLV-C62 मिशन भी निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर सका था। ISRO के मुताबिक रॉकेट के तीसरे चरण में आई एक ‘विसंगति’ के कारण उपग्रहों को तय कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। ऐसे में EOS-05 की सफलता अंतरिक्ष एजेंसी के लिए विशेष महत्व रखती है।

आठ महीने बाद फिर सफल हुआ प्रक्षेपण

लगभग आठ महीने के अंतराल के बाद GSLV-F17 और EOS-05 का प्रक्षेपण शुक्रवार तड़के सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इस सफलता से ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का मनोबल बढ़ा है और भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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बेहतर इमेजिंग से मिलेगी कई क्षेत्रों में मदद

EOS-05 से उच्च गुणवत्ता वाली इमेजिंग क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। इसके जरिए मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग की सुविधा मिलेगी। इससे पृथ्वी की सतह और उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के अध्ययन के लिए उपयोगी डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई

EOS-05 की सफल लॉन्चिंग के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ISRO की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है। उनके मुताबिक EOS-05 की नई इमेजिंग क्षमता भारत की अंतरिक्ष शक्ति को और मजबूत करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का भी उल्लेख किया।

लॉन्च देखने बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शक

इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण को देखने के लिए अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग बड़ी संख्या में श्रीहरिकोटा पहुंचे थे। आधी रात के बाद हुए लॉन्च को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। सफल प्रक्षेपण के साथ ही ISRO ने EOS-05 मिशन के जरिए पृथ्वी अवलोकन और रणनीतिक डेटा के क्षेत्र में नई क्षमता हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

EOS-05 की खास बातें

  • लॉन्च व्हीकल: GSLV-F17
  • उपग्रह: EOS-05
  • प्रक्षेपण समय: शुक्रवार तड़के 2:55 बजे
  • लॉन्च साइट: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
  • GSLV की उड़ान: 19वीं
  • मुख्य उद्देश्य: पृथ्वी अवलोकन और उन्नत इमेजिंग
  • विशेषता: भूतुल्यकालिक कक्षा से समर्पित इमेजिंग क्षमता

Location :  Sriharikota

Published :  4 September 2026, 12:22 PM IST