सिंधु नदी पर भारत का अनोखा दांव! बिना सीमेंट पत्थरों से बना चेक डैम, 4 करोड़ लीटर पानी का इंतजाम

लद्दाख के लेह स्थित उपशी में सिंधु नदी पर प्राकृतिक पत्थरों से रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इसके निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ। चेक डैम से नदी का जलस्तर करीब 10 फीट ऊपर उठ रहा है और करीब 4 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा रहा है, जिसे नहर के जरिए आसपास के खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 4 September 2026, 5:03 PM IST

Leh: लद्दाख के लेह से सिंधु नदी पर तैयार किए गए एक अनोखे रॉक चेक डैम की तस्वीर सामने आई है। लेह के उपशी इलाके में प्राकृतिक बड़े-बड़े पत्थरों की मदद से तैयार किए गए इस चेक डैम की सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इस ढांचे की वजह से सिंधु नदी के पानी का स्तर करीब 10 फीट तक ऊपर उठ रहा है और करीब 4 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा रहा है।

प्राकृतिक पत्थरों से तैयार हुआ चेक डैम

उपशी में बनाया गया यह चेक डैम सामान्य कंक्रीट के बांधों से अलग है। इसे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बड़े प्राकृतिक पत्थरों की मदद से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नदी के बहाव को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि पानी के स्तर को ऊपर उठाकर आसपास के इलाकों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। इस ढांचे के कारण सिंधु नदी का पानी करीब 10 फीट ऊपर उठ रहा है। इससे लगभग 40 मिलियन लीटर यानी 4 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा सकेगा। जमा पानी को नहर के जरिए आसपास के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।

बुआई के समय किसानों के सामने आती थी बड़ी परेशानी

सिंधु नदी गहरी घाटियों से होकर गुजरती है। खासकर वसंत के मौसम में जब किसान बुआई की तैयारी करते हैं, उस समय कई जगहों पर नदी का जलस्तर इतना कम हो जाता था कि पंप के जरिए पानी खेतों तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता था। इसका सीधा असर खेती पर पड़ता था। पानी की कमी के कारण किसान अपनी कृषि गतिविधियां पूरी क्षमता से नहीं कर पाते थे। इससे उनकी आमदनी प्रभावित होने के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा था।

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लद्दाख में ऐसे और चेक डैम बनाने की तैयारी

उपशी में तैयार किए गए चेक डैम को लद्दाख में पानी के स्थानीय इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन अब सिंधु नदी पर ऐसे और चेक डैम तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर ऐसे प्रोजेक्ट का काम शुरू हो चुका है, जबकि कई अन्य परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। अगर इन परियोजनाओं को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है तो सिंधु नदी के पानी का स्थानीय इस्तेमाल बढ़ सकता है।

सिंधु के पानी के स्थानीय इस्तेमाल पर बढ़ा जोर

यह परियोजना सिर्फ सिंचाई के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसे सिंधु नदी के पानी के स्थानीय उपयोग से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आपके इनपुट के मुताबिक, सिंधु जल संधि से जुड़े मौजूदा रणनीतिक घटनाक्रम के बीच भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में नदी के पानी के उपयोग के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। लद्दाख में सिंधु नदी भारत के लिए भौगोलिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में नदी के पानी को स्थानीय जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने वाला बुनियादी ढांचा तैयार करना सीमावर्ती इलाकों के विकास से भी जुड़ता है।

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पत्थरों का छोटा ढांचा

उपशी का यह रॉक चेक डैम आकार में भले ही बड़ा कंक्रीट बांध न हो, लेकिन इसका उद्देश्य काफी अहम है। प्राकृतिक पत्थरों से तैयार यह संरचना नदी के पानी का स्तर बढ़ाकर उसे सिंचाई व्यवस्था से जोड़ रही है। अगर लद्दाख में इस तरह के और चेक डैम तैयार किए जाते हैं तो आने वाले समय में सिंधु नदी के पानी का स्थानीय उपयोग और बढ़ सकता है। इससे शुष्क सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती को सहारा मिलने के साथ जल संरक्षण की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

Location :  Leh

Published :  4 September 2026, 5:03 PM IST