चीन की मिसाइल, PM मोदी का मास्टरस्ट्रोक! क्या अब इंडो-पैसिफिक में भारत ही लिखेगा नया इतिहास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया विदेश दौरे के दौरान इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, यूरेनियम और रणनीतिक सहयोग के कई अहम समझौते हुए। चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के बीच भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक और सामरिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 12 July 2026, 3:07 PM IST

New Delhi: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत ने अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया तीन देशों के दौरे ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई पहचान दी है। इस यात्रा के दौरान रक्षा, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और सामरिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस, ऑस्ट्रेलिया के साथ रणनीतिक साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से जुड़ा महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग सामने आया। वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। इन समझौतों को भारत की दीर्घकालिक सामरिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

चीन के मिसाइल परीक्षण ने बढ़ाई चिंता

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे से ठीक पहले चीन ने प्रशांत महासागर में परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। इस कदम के बाद कई देशों ने चिंता जताई। ऑस्ट्रेलिया में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की भूमिका अहम

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और रक्षा रणनीति का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' और 'सागर' नीति के तहत क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ाएगा।

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आगे की रणनीति पर दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता और वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों के बीच भारत की नई कूटनीतिक पहल भविष्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में इन समझौतों का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर भी दिखाई दे सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  12 July 2026, 3:07 PM IST