होटलों को Tannery और Chemical Factories वाली Red Category में क्यों रखा? पूर्वा अवस्थी से जानिए पूरा सच

जानिए कैसे होटलों को Tannery और Chemical Factories वाली Red Category में रखने से होटल इंडस्ट्री पर बेवजह की सख्ती बढ़ी। इस वर्गीकरण के चलते होटलों को अतिरिक्त नियमों, जांच और कागजी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। पूर्वा अवस्थी बता रही हैं कि इसका Eco-Friendly Hotels और Sustainable Hospitality पर क्या असर पड़ता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 November 2026, 8:59 AM IST

New Delhi: होटल इंडस्ट्री को लेकर पर्यावरण नियमों के तहत लागू की गई एक वर्गीकरण व्यवस्था लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सवाल यह है कि क्या पर्यावरण का ध्यान रखने वाले होटल और केमिकल फैक्ट्रियों या टेनरियों जैसे प्रदूषणकारी उद्योगों को एक ही श्रेणी में रखना सही है? Red Category में होटलों को शामिल किए जाने से होटल कारोबार पर अतिरिक्त नियमों और अनुपालन का बोझ बढ़ने की बात सामने आई है।

Red Category में होटल रखने से क्या हुई परेशानी?

पर्यावरण संबंधी नियमों के तहत उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है। Red Category में आमतौर पर अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग शामिल होते हैं। इनमें टेनरी और केमिकल फैक्ट्रियां जैसे उद्योग आते हैं।

Eco-Friendly Hotels पर भी बढ़ा Compliance का बोझ

होटल कारोबार में कई ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जो पानी की बचत, ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें अधिक प्रदूषणकारी उद्योगों के समान नियमों का सामना करना पड़े, तो उनके संचालन की लागत और प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं।

ऐसे में होटल इंडस्ट्री की मांग है कि वर्गीकरण करते समय केवल उद्योग के नाम के बजाय उसके वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव और प्रदूषण स्तर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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Poorva Awasthi ने उठाया वर्गीकरण का मुद्दा

Sustainability Strategist पूर्वा अवस्थी  ने इस मुद्दे के जरिए होटल इंडस्ट्री के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान खींचा है। उनका वीडियो इस सवाल को सामने रखता है कि क्या पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होटल प्रतिष्ठानों पर भी उसी तरह की सख्ती लागू होनी चाहिए, जैसी टेनरी और केमिकल फैक्ट्रियों पर होती है?

होटल इंडस्ट्री के लिए यह मुद्दा केवल नियमों का नहीं, बल्कि कारोबार को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और उचित नियमन के बीच संतुलन का भी है। जरूरी है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अलग-अलग उद्योगों की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर नियम तय किए जाएं।

Location :  New Delhi

Published :  4 November 2026, 8:59 AM IST