
हरियाणा बेमौसम बारिश से भीगा धान (Image Source: Pinterest)
Haryana: प्रदेश में रविवार को अचानक मौसम बदलने और कई जिलों में बारिश होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं। अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखा धान भीग गया, जबकि खेतों में खड़ी और कटाई के बाद पड़ी फसल पर भी मौसम की मार पड़ने की आशंका है। यमुनानगर और करनाल समेत कई इलाकों में बारिश के बाद मंडियों में फसल को सुरक्षित रखने के इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों को अब धान सुखाने और सरकारी खरीद के मानकों को पूरा करने की चिंता सताने लगी है।
यमुनानगर में रविवार को छुट्टी के कारण धान की सरकारी खरीद बंद थी, लेकिन मंडियों में फसल की आवक जारी रही। इसी बीच अचानक आसमान में काले बादल छाए और बारिश शुरू हो गई। मजदूरों ने आनन-फानन में धान के ढेरों को तिरपाल से ढकने की कोशिश की, लेकिन कई जगह बारिश का पानी नीचे से भी फसल तक पहुंच गया।
करनाल की अनाज मंडियों में भी बारिश से खुले में रखी धान की ढेरियां और बोरियां भीग गईं। सुबह से छाए बादलों के बाद पहले बूंदाबांदी हुई और फिर तेज बारिश शुरू हो गई। किसानों ने तिरपाल और शेड की मदद से अपनी उपज बचाने का प्रयास किया, लेकिन पर्याप्त ढके हुए स्थान की कमी के चलते परेशानी बनी रही।
अंबाला के मोहड़ा अनाज मंडी क्षेत्र में भी बारिश से धान भीगने की सूचना सामने आई। इन घटनाओं ने मंडियों में फसल को खराब मौसम से बचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नरवाना में रविवार सुबह से ही तेज हवाओं और ठंडक के कारण मौसम बदला हुआ था। करीब 10 बजे आसमान में अंधेरा छाने लगा और 11 बजे के आसपास बूंदाबांदी शुरू हुई। दोपहर करीब 12:20 बजे तेज बारिश हुई। शहर के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई, जबकि अन्य इलाकों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई।
नरवाना की नई अनाज मंडी में उस समय तक हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाएं चलने की सूचना थी। दूसरी ओर, झज्जर में सुबह से काले बादल छाए रहे और तेज हवाएं चलती रहीं। मौसम विभाग ने हल्की बूंदाबांदी और बारिश की संभावना जताई थी। मंडी में खुले में रखी धान और बाजरे की फसल को लेकर चिंता बनी रही।
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बारिश के बाद किसानों के सामने भीगी फसल को सुखाने और सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। धान में नमी बढ़ने से सरकारी खरीद के दौरान परेशानी आ सकती है। निर्धारित मानकों के अनुरूप नमी नहीं होने पर किसानों को फसल सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
खेतों में अभी जिन किसानों की धान की कटाई बाकी है, उनकी चिंता भी बढ़ गई है। बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने के कारण कटाई का काम प्रभावित हो सकता है। खेतों के सूखने में समय लगने से अगले दो से तीन दिनों तक कटाई में परेशानी आने की आशंका जताई गई है।
किसानों की मांग है कि मंडियों में पर्याप्त शेड, तिरपाल और फसल को सुरक्षित रखने के दूसरे इंतजाम किए जाएं। अचानक मौसम बदलने की स्थिति में बेहतर व्यवस्था होने से उनकी मेहनत और उपज को नुकसान से बचाया जा सकता है। फिलहाल, मौसम की स्थिति और मंडियों में फसल की सुरक्षा किसानों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।
Location : Haryana
Published : 11 October 2026, 5:20 PM IST