पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी: दिल्ली-बेंगलुरु में शांति, चेन्नई में गिरे दाम, जानिए नोएडा-तिरुवनंतपुरम के ताजे रेट

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। दिल्ली में कीमतें स्थिर हैं, जबकि चेन्नई-जयपुर में तेल सस्ता हुआ है। वहीं नोएडा और तिरुवनंतपुरम में दाम बढ़ गए हैं। ब्रेंट क्रूड $105 के पार पहुंच गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 May 2026, 8:46 AM IST

New Delhi: महीने की 21 तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। आज का दिन आम उपभोक्ताओं के लिए मिलाजुला रहा है। देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल आज भी 98.64 रुपये और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है।

वहीं दूसरी तरफ, चेन्नई, जयपुर और पटना के निवासियों के लिए अच्छी खबर है। चेन्नई में पेट्रोल 35 पैसे टूटकर 104.57 रुपये पर आ गया है, जबकि जयपुर में यह 30 पैसे की गिरावट के साथ 108.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में भी पेट्रोल के दाम में 4 पैसे की मामूली कमी आई है।

नोएडा से तिरुवनंतपुरम तक जेब पर बढ़ा बोझ

एक तरफ जहां कुछ शहरों में तेल के दाम घटे हैं, वहीं दिल्ली से सटे नोएडा और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में ग्राहकों की टेंशन बढ़ गई है। नोएडा में आज पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 19 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद यहाँ पेट्रोल 98.65 रुपये और डीजल 91.93 रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा भुवनेश्वर में पेट्रोल 21 पैसे महंगा होकर 105.33 रुपये का हो गया है।

तिरुवनंतपुरम में सबसे ज्यादा असर देखा गया, जहां पेट्रोल 18 पैसे और डीजल 29 पैसे की उछाल के साथ क्रमशः 111.71 रुपये और 100.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। दरअसल, हर राज्य में वैट (VAT) और केंद्र के एक्साइज ड्यूटी के अलग-अलग गणित के कारण शहरों में कीमतों का यह अंतर देखने को मिलता है।

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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल में उबाल, ट्रंप के बयान पर नजर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर हल्की तेजी का रुख है। ब्रेंट क्रूड अपनी पिछली गिरावट से उबरते हुए $105 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) $99 के आसपास बना हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल में यह स्थिरता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में होने का दावा किया है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद जगी है। हालांकि, फरवरी के अंत से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा का बड़ा उछाल आ चुका है।

सरकारी कंपनियों को भारी घाटा, पर जनता को मिली सुरक्षा

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने के बावजूद भारत में इसका सीधा असर आम जनता पर कम पड़ने दिया गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 76 दिनों तक बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाया, जिससे उन्हें 24,500 करोड़ रुपये का भारी 'अंडर-रिकवरी' नुकसान झेलना पड़ा।

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इसके बाद ही कंपनियों ने दो किस्तों में महज 3.91 रुपये तक दाम बढ़ाए। केंद्र सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी घटाकर करीब 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान सहा है ताकि कीमतें काबू में रहें। दुनिया के अन्य देशों जैसे अमेरिका में जहां पेट्रोल 45 फीसदी और म्यांमार-यूएई में 50 फीसदी से ज्यादा महंगा हुआ है, उसके मुकाबले भारत में यह बढ़ोतरी सिर्फ 4.4 फीसदी तक ही सीमित रही है।

Location :  New Delhi

Published :  21 May 2026, 8:46 AM IST