
पूर्व ACP केपी कुकरेती (IMG: Dynamite News)
New Delhi: पुलिस कार्रवाई को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच दिल्ली पुलिस के पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने संसद में बैठे नेताओं के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करने वाले कई नेता न तो पुलिस अधिकारी हैं और न ही कानूनी विशेषज्ञ। ऐसे में बिना तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया को समझे दिए गए बयान लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं। कुकरेती ने यह भी कहा कि किसी घटना के लिए सीधे केंद्रीय गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
केपी कुकरेती ने कहा कि किसी भी पुलिस कार्रवाई के लिए सीधे केंद्रीय गृहमंत्री को जिम्मेदार ठहराना भ्रामक और तथ्यों से परे है। उनके मुताबिक, कानून-व्यवस्था से जुड़े हालात में मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी और वास्तविक पुलिस प्रक्रिया में अंतर समझना जरूरी है। किसी भी कार्रवाई का मूल्यांकन कानून और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
पूर्व एसीपी ने कहा कि पेलेट गन को लेकर आम जनता के बीच कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उनका कहना था कि अधिकांश लोगों को इसके इस्तेमाल, उद्देश्य और कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए इस विषय पर बिना तथ्यात्मक जानकारी के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
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केपी कुकरेती ने छात्रों और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना लोगों का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है और यह व्यवस्था का हिस्सा भी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक भीड़ में बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार, जब कोई भीड़ कानून तोड़ने लगती है, पत्थरबाजी करती है, बैरिकेड तोड़ती है और प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज करती है, तब स्थिति पूरी तरह बदल जाती है।
पूर्व एसीपी का कहना है कि जब कोई भीड़ हिंसक और अनियंत्रित हो जाती है, तो उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पुलिस के पास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित विकल्प बचते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कानून कुछ विशेष और चरम परिस्थितियों में पुलिस को बल प्रयोग की अनुमति देता है। हालांकि, किस परिस्थिति में कितना बल प्रयोग उचित है, यह प्रत्येक मामले के तथ्यों, लागू कानून और जांच के आधार पर तय किया जाता है।
केपी कुकरेती ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी के जीवन पर सीधा खतरा हो या जनता एवं सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का गंभीर सवाल खड़ा हो जाए, तो मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल निर्णय लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल, मुख्यमंत्री या गृह मंत्री घटनास्थल पर मौजूद नहीं होते। इसलिए मौके की परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई का निर्णय संबंधित पुलिस अधिकारी ही लेते हैं।
अपने बयान के दौरान पूर्व एसीपी ने संसद जैसे संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसद पर हमला या ऐसी किसी संस्था की सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश अराजकता का गंभीर उदाहरण है और ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों को कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं।
Location : New Delhi
Published : 31 July 2026, 3:42 PM IST