
संजय निषाद (Image : Pinterest)
New Delhi: अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और आरक्षण पाने की मांग को लेकर दिल्ली में मछुआरा समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। इस मांग को उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद का भी समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि समुदाय के बच्चों को शिक्षा और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान उठे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि मछुआरा समुदाय की मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
मछुआरा समुदाय के लोगों ने दिल्ली में अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किए जाने और आरक्षण से जुड़े अधिकारों को मान्यता देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर विचार किया जाना चाहिए। समुदाय से जुड़े लोगों ने पारंपरिक रोजगार से संबंधित समस्याओं का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि नदी, जलाशयों और नदी के किनारों से जुड़े काम उनके जीवन और आजीविका का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में इनसे संबंधित अधिकारों और रोजगार के अवसरों को सुरक्षित करना भी जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने प्रदर्शन कर रहे मछुआरा समुदाय के लोगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए और उनके बच्चों की शिक्षा पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। संजय निषाद ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उनका आरोप था कि पहले की सरकारों ने समुदाय से समर्थन तो लिया, लेकिन उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं किया। उन्होंने उत्तराखंड में जातियों के समूह को लेकर अपनाए गए दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में भी मछुआरा समुदाय की मांग पर इसी तरह विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली में निषाद समुदाय के कुछ वर्ग अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं, तो दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले समान समुदायों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, किसी क्षेत्र में किसी जाति या समुदाय को मिला दर्जा दूसरे राज्य में अपने आप लागू नहीं हो जाता। इसके लिए संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेना जरूरी है।
मछुआरा समुदाय की मांग केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों में बच्चों की पढ़ाई, सरकारी सुविधाओं तक पहुंच और पारंपरिक रोजगार को लेकर भी चिंता सामने आई है। समुदाय का कहना है कि जल स्रोतों और नदियों से जुड़े पारंपरिक कामों में आने वाली परेशानियों का समाधान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, आजीविका के अवसरों को सुरक्षित करने से परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। संजय निषाद ने भी बच्चों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को समुदाय के विद्यार्थियों को पढ़ाई के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं किसी भी समुदाय के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
किसी समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करना केवल राज्य सरकार के ऐलान से पूरा नहीं होता। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। संबंधित राज्य के संदर्भ में प्रस्ताव, जांच और संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही सूची में बदलाव संभव होता है। इसी वजह से मछुआरा समुदाय की मांग पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समुदाय के लोग चाहते हैं कि उनकी सामाजिक स्थिति और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनकी पात्रता पर विचार किया जाए।
दिल्ली में हुए प्रदर्शन ने मछुआरा समुदाय के आरक्षण, शिक्षा और पारंपरिक रोजगार से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। संजय निषाद के समर्थन के बाद इस मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो सकती है।
Location : New Delhi
Published : 21 October 2026, 5:41 PM IST