
आयोजित कार्यक्रम
फरीदाबाद : विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश के बच्चे अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी का महत्व भी समझेंगे। इसी सोच के साथ फरीदाबाद के मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां ‘भारत की सोच’ के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने बच्चों को भारतीय संस्कृति, अच्छे संस्कार और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का संदेश दिया।
'मानव रचना सेंटर फॉर पीस एंड सस्टेनेबिलिटी' और 'भारत की सोच' थिंक टैंक की इस अनूठी संयुक्त पहल की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस खास मौके पर दिल्ली-एनसीआर के 12 प्रतिष्ठित स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिनमें 6 मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल भी शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत में 'भारत की सोच' के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने विकसित भारत के विजन पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का निर्माण केवल बड़ी इमारतों या इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं हो सकता, देश को असली मायने में विकसित बनाने के लिए हमें सॉफ्ट पावर यानी मानवीय मूल्यों और संस्कारों पर काम करना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। हर नागरिक को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए इसमें योगदान देना होगा। अनिल राजपूत ने नीतिगत दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव लाते हुए रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण का असली काम हमारे छोटे स्कूली बच्चों से ही शुरू होना चाहिए।
अनिल राजपूत ने एक बेहद दिलचस्प विचार साझा करते हुए कहा कि अक्सर युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, लेकिन वास्तव में छोटे बच्चे अपने माता-पिता, परिवार और समाज को तुरंत प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ये बच्चे केवल देश का भविष्य ही नहीं, हमारा वर्तमान भी हैं। इसी वजह से बच्चे आज के समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के सबसे बड़े माध्यम यानी कैटलिस्ट हैं।
Location : Faridabad
Published : 26 October 2026, 4:58 PM IST