El Nino को लेकर WMO का महा-अलर्ट: प्रशांत महासागर में पैदा हुआ ‘मौसम का विलेन’, जानें आप पर क्या होगा असर?

प्रशांत महासागर में कुछ ऐसा बदल रहा है जिससे 2026 में दुनिया का मौसम पूरी तरह पलट जाएगा! WMO ने जुलाई से सितंबर के बीच भीषण गर्मी और सूखे का महा-संकट जताया है। क्या आपका शहर भी इस खतरे की जद में है? मौसम का यह खतरनाक रूप जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 3:57 PM IST

New Delhi: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक मौसम को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। WMO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Nino) की स्थिति बेहद तेजी से मजबूत हो सकती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के संयुक्त आकलन बताते हैं कि इस अवधि में मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रह सकता है, जो एक बेहद शक्तिशाली अल नीनो का स्पष्ट संकेत है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सितंबर से नवंबर 2026 के बीच इसका प्रभाव अपने चरम पर पहुंच सकता है, जिससे दुनिया भर के मौसम का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर अल नीनो क्या है, इसका दुनिया पर क्या असर होगा और यह भारत के लिए कितनी बड़ी चिंता का विषय है।

आखिर क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ती है इससे चिंता?

सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो (El Nino) एक प्राकृतिक जलवायु घटना (Climate Pattern) है। इसके तहत प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है। समुद्र के गर्म होने की यह प्रक्रिया आमतौर पर हर 2 से 7 साल के अंतराल पर विकसित होती है और इसका प्रभाव लगभग 9 से 12 महीने तक बना रह सकता है।

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अक्सर यह प्रक्रिया मार्च से जून के बीच आकार लेना शुरू करती है, जबकि नवंबर से फरवरी के दौरान इसका असर सबसे भयानक रूप में सामने आता है। चूंकि समुद्र के तापमान में होने वाला यह बदलाव सीधे तौर पर दुनिया भर के वायुमंडल और मौसम प्रणालियों को प्रभावित करता है, इसलिए इसके सक्रिय होते ही वैश्विक स्तर पर मौसम का मिजाज बदल जाता है। यही वजह है कि जब भी अल नीनो के मजबूत होने के संकेत मिलते हैं, तो वैज्ञानिक, सरकारें और कृषि क्षेत्र अलर्ट मोड पर आ जाते हैं।

भीषण गर्मी की चपेट में होगी दुनिया?

WMO की रिपोर्ट एक डराने वाली तस्वीर पेश करती है। इसके मुताबिक, केवल प्रशांत महासागर ही नहीं, बल्कि हिंद महासागर और उष्णकटिबंधीय (Tropical) अटलांटिक महासागर की सतह का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिणी और उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर दुनिया के अधिकांश आबादी वाले इलाकों में सामान्य से कहीं अधिक तापमान दर्ज किया जाएगा।

समुद्रों का यह बढ़ा हुआ तापमान सीधे तौर पर हीटवेव (भीषण गर्मी), जंगलों में आग और जल संकट जैसी चरम स्थितियों को जन्म देगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि समुद्रों का तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहा, तो साल 2026 दुनिया के कई हिस्सों में असामान्य मौसम और तबाही का वर्ष साबित हो सकता है।

भारत में मॉनसून पर संकट

भारतीय उपमहाद्वीप के लिए यह रिपोर्ट सीधे तौर पर कृषि और जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ाने वाली है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत समेत पूरे उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। वर्षा की इस कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई, खाद्य उत्पादन और देश के जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि देश के सभी हिस्सों में एक जैसा मौसम नहीं रहेगा। भारत में अल नीनो का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसकी तीव्रता कितनी है और 'इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) जैसी अन्य जलवायु प्रणालियां कैसा व्यवहार करती हैं। यदि IOD अनुकूल रहता है, तो वह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। यही कारण है कि कुछ राज्यों में सामान्य या अधिक वर्षा भी हो सकती है, जबकि कई इलाके सूखे की चपेट में रहेंगे।

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वैश्विक स्तर पर प्रभाव: कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता, बल्कि क्षेत्रवार इसके अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे-

मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर: इन क्षेत्रों के आसपास सामान्य से अत्यधिक वर्षा और भीषण बाढ़ आने का खतरा है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया: भारत, ऑस्ट्रेलिया और हिंद महासागर के हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी, जिससे सूखा और कृषि संकट गहरा सकता है।

यूरोप: दक्षिणी यूरोप में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हो सकती है, जबकि उत्तरी यूरोप में सूखा और कम बारिश की स्थिति रहेगी।

मध्य और दक्षिण अमेरिका: मध्य अमेरिका, कैरेबियन और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी बारिश की भारी कमी देखी जाएगी, जिससे सूखे का संकट बढ़ेगा।

लगातार निगरानी और अपडेट रहना ही एकमात्र उपाय

मौसम वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि अल नीनो का मतलब यह नहीं है कि पूरी दुनिया में केवल सूखा ही पड़ेगा या सिर्फ बाढ़ ही आएगी। यह स्थानीय मौसम प्रणालियों के साथ मिलकर बदलता रहता है। इसी वजह से वैज्ञानिक लगातार समुद्री सतह के तापमान और वायुमंडलीय बदलावों की निगरानी कर रहे हैं। आने वाले समय में अल नीनो की बदलती तीव्रता के आधार पर पूर्वानुमानों में बदलाव संभव है, इसलिए किसानों और आम जनता को मौसम विभाग और WMO द्वारा समय-समय पर जारी होने वाले अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

Location :  New Delhi

Published :  4 July 2026, 3:57 PM IST