
प्रतीकात्मक छवि
New Delhi: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि अग्नि-6 बैलिस्टिक मिसाइल का विकास पूरी तरह से केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार हरी झंडी देगी, DRDO इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अग्नि-6 भारत की अगली पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) मानी जा रही है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया जाना प्रस्तावित है। यह मौजूदा अग्नि-5 मिसाइल का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण होगी। इसकी मारक क्षमता 10,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जिससे यह लंबी दूरी के रणनीतिक लक्ष्यों को भेदने में सक्षम होगी।
अग्नि-6 की सबसे बड़ी खासियत इसकी MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक होगी। इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल में कई परमाणु वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकते हैं।
यह मिसाइल भारत की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता को और मजबूत करेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अग्नि-6 के शामिल होने से भारत अपनी परमाणु त्रि-आयामी क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) को और प्रभावी बना सकेगा और लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता हासिल करेगा।
अग्नि-6 के जरिए भारत एशिया और उससे आगे के क्षेत्रों तक रणनीतिक पहुंच बना सकेगा। खासतौर पर चीन जैसे देशों के दूरस्थ हिस्सों को भी इस मिसाइल की जद में लाया जा सकेगा, जिससे भारत की सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता में बड़ा इजाफा माना जा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 30 April 2026, 5:14 PM IST