
Devghar: सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने और उन्हें कक्षा के अनुरूप दक्ष बनाने के दावों के बीच देवघर जिले से सामने आए आंकड़े प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। कक्षा एक से तीन तक के बच्चों की हिंदी, अंग्रेजी और गणित की बुनियादी समझ परखने के लिए चलाए जा रहे 'मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण' कार्यक्रम में जिले के 923 विद्यालयों का आकलन अब तक बाकी है। वहीं, जिन विद्यालयों में मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें भी बड़ी संख्या निर्धारित निपुणता के स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
जिले के कुल 1,935 विद्यालयों में बच्चों की शैक्षणिक दक्षता का आकलन किया जाना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,012 विद्यालयों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो पाई है। यानी निर्धारित विद्यालयों में लगभग 47.7 प्रतिशत का आकलन अभी बाकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि प्राथमिक शिक्षा की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में जब बड़ी संख्या में विद्यालयों का मूल्यांकन ही पूरा नहीं हुआ है, तो बच्चों की बुनियादी दक्षता की पूरी तस्वीर कब सामने आएगी?
'मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण' कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणितीय सवालों को समझने की क्षमता को परखना है। इसके तहत विद्यार्थियों से चित्रों, चार्ट और सवालों के माध्यम से प्रश्न पूछे जाते हैं। उनके प्रदर्शन के आधार पर विद्यालयों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज जैसी श्रेणियों में रखा जाता है।
लेकिन इस अभियान के दौरान सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि चुनौती सिर्फ बच्चों का मूल्यांकन करने तक सीमित नहीं है। कई प्रखंडों में ऐसे विद्यालयों की संख्या काफी अधिक है, जहां विद्यार्थी निर्धारित बुनियादी दक्षता हासिल नहीं कर पाए हैं। प्राथमिक कक्षाओं में ही पढ़ने-समझने की क्षमता कमजोर रह जाना आगे की पढ़ाई के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
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'मेरा विद्यालय निपुण, मैं भी निपुण' कार्यक्रम (IMG: Dynamite News)
प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कई इलाकों में स्थिति विशेष ध्यान देने की मांग करती है। मधुपुर प्रखंड के 125 आकलित विद्यालयों में 73 विद्यालयों के विद्यार्थी निर्धारित निपुणता हासिल नहीं कर पाए। यानी आकलन किए गए विद्यालयों में करीब 58.4 प्रतिशत इस स्तर तक नहीं पहुंच सके। सारठ प्रखंड में 143 विद्यालयों के आकलन के बाद 86 विद्यालयों के विद्यार्थी निर्धारित दक्षता हासिल करने में पीछे रहे। यह संख्या लगभग 60.1 प्रतिशत है।
मोहनपुर प्रखंड में आकलन किए गए 143 विद्यालयों में से 76 विद्यालय निर्धारित निपुणता की श्रेणी में जगह नहीं बना पाए। वहीं, मारगोमुंडा प्रखंड के 75 आकलित विद्यालयों में 63 विद्यालयों के विद्यार्थी निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच सके। यहां यह आंकड़ा 84 प्रतिशत के आसपास है।
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मारगोमुंडा के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। यहां आकलन किए गए 75 विद्यालयों में से 63 विद्यालय निपुणता की निर्धारित श्रेणी तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर बच्चों की बुनियादी दक्षता कमजोर रहने के पीछे प्रमुख कारण क्या हैं?
जिला मुख्यालय वाले देवघर प्रखंड की तस्वीर भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यहां 126 विद्यालयों में आकलन के बाद 54 को गोल्ड, 16 को सिल्वर और 20 को ब्रॉन्ज श्रेणी में रखा गया। वहीं, 36 विद्यालयों के विद्यार्थी निर्धारित दक्षता हासिल नहीं कर पाए। देवीपुर प्रखंड के 88 आकलित विद्यालयों में 44 विद्यालय निपुणता की श्रेणी से बाहर रहे। यानी यहां आकलित विद्यालयों में आधे विद्यालय निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच सके।
पालोजोरी में 124 विद्यालयों के आकलन के बाद 28 विद्यालय निर्धारित निपुणता हासिल नहीं कर पाए। उपलब्ध आंकड़ों में सारवां और सोनारायठाढ़ी के करीब 122 विद्यालयों के आकलन के बाद 45 विद्यालयों के निर्धारित श्रेणी से बाहर रहने की जानकारी दी गई है।
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पांच चरणों का अभियान (IMG: Dynamite News)
यह कार्यक्रम 26 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। इसे कुल पांच चरणों में पूरा किया जाना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन चरण पूरे हो चुके हैं। जिले के देवघर, देवीपुर, करौं, मधुपुर, मारगोमुंडा, मोहनपुर, पालोजोरी, सारठ, सारवां और सोनारायठाढ़ी प्रखंडों के विद्यालय इस अभियान में शामिल हैं।
कार्यक्रम से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि क्विज और प्रतियोगिता आधारित गतिविधियों से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ रही है। शिक्षिका रागिनी कुमारी के अनुसार, बच्चे बेहतर प्रदर्शन और पुरस्कार पाने की उम्मीद में घर से तैयारी करके विद्यालय आ रहे हैं।
Location : Deoghar
Published : 30 October 2026, 2:05 PM IST
Topics : Deoghar News Jharkhand Education News Nipun Assessment Primary Education School Assessment 2026