अब विदेशी नहीं, देसी तकनीक से दौड़ेंगी मेट्रो! दिल्ली की रेड लाइन पर जल्द होगा बड़ा ट्रायल

दिल्ली मेट्रो में जल्द स्वदेशी CBTC तकनीक का ट्रायल होगा। रेड लाइन के शास्त्री पार्क-शाहदरा सेक्शन पर पांच किलोमीटर में होगी जांच। जानिए इस तकनीक के फायदे और मेट्रो संचालन में होने वाले बदलाव।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 8 November 2026, 1:57 PM IST
New Delhi: देश के मेट्रो नेटवर्क में ट्रेन संचालन और निगरानी के लिए अब विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होने वाली है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) स्वदेशी कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) सिस्टम विकसित कर रहा है। DMRC की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तकनीक को विकसित करने के सभी चरण पूरे हो चुके हैं। जल्द ही दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन पर इसका फील्ड ट्रायल शुरू किया जाएगा।

ट्रायल के लिए रेड लाइन पर शास्त्री पार्क से शाहदरा के बीच करीब पांच किलोमीटर के हिस्से को चुना गया है। यहां स्वदेशी CBTC सिस्टम के उपकरण लगाए जाएंगे और इसकी कार्यक्षमता व तकनीकी वैलिडेशन की जांच होगी। इसके लिए उपकरणों के निर्माण के ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं।

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इस तकनीक को DMRC, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) मिलकर विकसित कर रहे हैं। सिस्टम की तकनीकी जरूरतें और स्पेसिफिकेशन तैयार करने के बाद विभिन्न सब-सिस्टम के प्रोटोटाइप बनाकर लैब में परीक्षण भी किया जा चुका है।

फिलहाल दिल्ली मेट्रो की मजेंटा और पिंक लाइन पर CBTC तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि दूसरे कॉरिडोर पर ऑटोमैटिक ट्रेन सुपरविजन (ATS) सिस्टम काम कर रहा है। DMRC की योजना पुराने कॉरिडोर पर भी आधुनिक CBTC तकनीक लागू करने की है।

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क्या है CBTC तकनीक?

कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल यानी CBTC आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है। इसमें मेट्रो ट्रेन और कंट्रोल सिस्टम के बीच लगातार कम्युनिकेशन होता है। इससे ट्रेन की वास्तविक लोकेशन, रफ्तार और दूसरी ट्रेनों से उसकी दूरी की जानकारी मिलती रहती है। इस तकनीक से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।

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स्वदेशी CBTC से क्या होंगे फायदे?

  • भारतीय मेट्रो नेटवर्क की विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।
  • करीब 90 सेकंड के अंतराल पर ट्रेनें चलाने की क्षमता विकसित हो सकेगी।
  • विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटने से संचालन और रखरखाव की लागत कम हो सकती है।
  • अलग-अलग कॉरिडोर पर एक समान तकनीक लागू करने में मदद मिलेगी।
  • ट्रेन संचालन और निगरानी पहले से ज्यादा आधुनिक और प्रभावी होगी।

ट्रायल सफल रहने पर फेज-4 के एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर में पहली बार इस स्वदेशी CBTC तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  8 November 2026, 1:57 PM IST