
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
New Delhi: दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू को भी उजागर कर दिया है। बुधवार सुबह लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिससे यह हादसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, फ्लोरिश स्टे कोई सामान्य होटल नहीं था। यह दिल्ली में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों और उनके परिजनों का प्रमुख ठिकाना बन चुका था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि बीते एक महीने में यहां 80 से अधिक विदेशी नागरिक ठहरे थे।
दिल्ली देश का प्रमुख मेडिकल हब माना जाता है। यहां हर साल हजारों विदेशी मरीज इलाज के लिए आते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फ्लोरिश स्टे होटल में ठहरने वाले अधिकांश विदेशी नागरिक मेडिकल वीजा पर भारत पहुंचे थे। इनमें गंभीर बीमारियों का इलाज कराने आए मरीजों के अलावा उनके तीमारदार और परिवार के सदस्य भी शामिल थे। होटल की लोकेशन, अस्पतालों के नजदीक होने और अपेक्षाकृत सस्ती सुविधाओं के कारण यह विदेशी नागरिकों की पहली पसंद बन गया था।
यही वजह रही कि हादसे के समय भी होटल में बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान मौजूद थे।
इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में नेपाल, बांग्लादेश, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कांगो, नाइजीरिया, लाइबेरिया और मोजांबिक के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 21 अन्य विदेशी नागरिक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। घायलों में केन्या और कैमरून के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
अग्निकांड के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या मृतकों और घायलों की पहचान सुनिश्चित करना था। आग इतनी भीषण थी कि होटल का रजिस्टर, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य दस्तावेज पूरी तरह जलकर राख हो गए। ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) की मदद ली। एफआरआरओ के रिकॉर्ड के जरिए होटल में ठहरे विदेशी नागरिकों की जानकारी जुटाई गई और उनके दूतावासों से संपर्क स्थापित किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और वीजा संबंधी सूचनाओं की मदद से पहचान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जहां एक ओर आग की लपटें और चीख-पुकार का माहौल था, वहीं दूसरी ओर एक स्थानीय कारोबारी ने अपनी सूझबूझ और मानवता से कई लोगों की जान बचा ली। होटल के सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी ने आग लगते ही बिना देर किए अपनी दुकान के दर्जनों गद्दे और रजाइयां सड़क पर बिछा दीं। उनकी इस पहल ने होटल में फंसे लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से नीचे कूद रहे थे। ऐसे में सड़क पर बिछाए गए गद्दों ने उन्हें गंभीर चोटों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया कि सुबह अचानक शोर सुनकर वह बाहर आए तो देखा कि होटल की ऊपरी मंजिलों से धुआं निकल रहा है और लोग मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपने कर्मचारियों को बुलाया और सड़क पर गद्दे तथा रजाइयां बिछाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, करीब आठ लोगों ने सीधे गद्दों पर छलांग लगाई, जबकि कुल मिलाकर लगभग 20 लोगों की जान बचाने में यह व्यवस्था मददगार साबित हुई।
रियाजुद्दीन ने कहा कि उस समय उनके मन में केवल एक ही विचार था कि किसी भी तरह लोगों को सुरक्षित बचाया जाए। उन्होंने कहा, "जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। पैसा फिर आ जाएगा, लेकिन किसी की जान वापस नहीं आ सकती।"
बचाव कार्य के दौरान रियाजुद्दीन और उनके बेटे अरमान को भी चोटें आईं। इसके बावजूद दोनों लगातार लोगों की मदद करते रहे। स्थानीय लोगों ने भी राहत एवं बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई। फिलहाल अग्निकांड के कारणों की जांच जारी है। प्रशासन होटल की सुरक्षा व्यवस्थाओं, अग्निशमन उपकरणों और भवन नियमों के अनुपालन की भी जांच कर रहा है।
Location : New Delhi
Published : 5 June 2026, 11:09 AM IST
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