कॉकरोच कैसे बचे रहे महाविनाशों में जब डायनासोर भी खत्म हो गए, जानिए चौंकाने वाली सच्चाई

कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच सवाल उठा कि कॉकरोच धरती पर कहां से आए और कैसे डायनासोर के खत्म होने के बावजूद बच गए। 30 करोड़ साल पुराने ये जीव अपनी बनावट, भोजन आदत और सहनशक्ति से हर आपदा में जीवित रहे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 6 June 2026, 2:40 PM IST

New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज “कॉकरोच जनता पार्टी” ने अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन NEET-UG पेपर लीक और CBSE, CUET तथा SSC-GD जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जवाबदेही की मांग को लेकर किया गया। पार्टी के इस अनोखे नाम ने लोगों का ध्यान खींचा और साथ ही एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया कि आखिर कॉकरोच धरती पर आए कहां से और इतने बड़े बदलावों और आपदाओं के बावजूद वे कैसे बचते रहे?

कॉकरोच की उत्पत्ति: करोड़ों साल पुराना इतिहास

वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार कॉकरोच धरती पर लगभग 30 करोड़ साल पहले कार्बोनिफेरस काल के दौरान मौजूद थे। यह वह समय था जब डायनासोर के अस्तित्व में आने से भी करीब 12 करोड़ साल पहले ही कॉकरोच पृथ्वी पर फल-फूल रहे थे। जीवाश्मों से यह पता चलता है कि इनके शुरुआती पूर्वज प्राचीन महाद्वीप पेंजिया के घने और नमी वाले जंगलों में रहते थे।

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शारीरिक बनावट: मुश्किल हालात में छिपने की क्षमता

कॉकरोच के जीवित रहने का एक बड़ा कारण उनकी शारीरिक संरचना है। इनका शरीर प्राकृतिक रूप से चपटा और लचीला होता है, जिससे वे बहुत छोटी दरारों, जमीन के नीचे की जगहों और पत्थरों के बीच आसानी से छिप सकते हैं। बड़े पैमाने पर होने वाली आपदाओं जैसे एस्टेरॉइड की टक्कर, जंगल की आग या गंभीर मौसम परिवर्तन के दौरान ये सुरक्षित स्थान उनके लिए ढाल का काम करते थे। यही क्षमता उन्हें कई विनाशकारी घटनाओं से बचाती रही।

हर तरह का भोजन: जीवित रहने की मजबूत रणनीति

डायनासोर के विपरीत कॉकरोच भोजन के मामले में बेहद अनुकूल होते हैं। वे लगभग सब कुछ खा सकते हैं। इनमें मरे हुए जीव, सड़ते हुए पेड़-पौधे, कागज, कार्डबोर्ड, बाल, गोंद और यहां तक कि सड़ती हुई लकड़ी भी शामिल है। इस “सर्वाहारी” प्रवृत्ति ने उन्हें कठिन समय में भी जीवित रहने में मदद की।

कॉकरोच के अंडे एक मजबूत सुरक्षा कवच के अंदर सुरक्षित रहते हैं, जिसे ऊथेका कहा जाता है। यह कवच भ्रूण को गर्मी, ठंड, सूखेपन और बाहरी पर्यावरणीय बदलावों से बचाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि अगर वयस्क कॉकरोच मर जाएं, तब भी उनके अंडे सुरक्षित रहकर आगे नई पीढ़ी को जन्म देते हैं।

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कम ऊर्जा में जीवन: लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता

कॉकरोच को जीवित रहने के लिए बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है क्योंकि वे ठंडे खून वाले जीव होते हैं। वे बिना भोजन के एक महीने से ज्यादा और बिना पानी के कई हफ्तों तक जीवित रह सकते हैं। उनकी यह सहनशक्ति उन्हें अकाल और पर्यावरणीय संकटों के समय बेहद सक्षम बनाती है।

रेडिएशन और कठोर परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता

कॉकरोच को रेडिएशन के उच्च स्तर को सहने की क्षमता के लिए भी जाना जाता है, जिन्हें इंसान सहन नहीं कर सकते। उनकी कोशिकाएं अपेक्षाकृत धीमी गति से विभाजित होती हैं, जिससे रेडिएशन से होने वाले नुकसान का असर उन पर कम पड़ता है। यही कारण है कि वे बड़े विनाशकारी परिवर्तनों के बावजूद धरती पर लंबे समय तक टिके रहे।

Location :  New Delhi

Published :  6 June 2026, 2:40 PM IST