बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही सात राज्यों और जम्मू कश्मीर की कुल आठ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित किए जा रहे हैं। झारखंड से लेकर पंजाब, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, मिजोरम और जम्मू-कश्मीर तक हर सीट पर जोरदार मुकाबला देखने को मिला।

सात राज्यों में उपचुनाव के नतीजे
Patna: बिहार विधानसभा चुनाव के साथ हुए देशभर के उपचुनावों की राजनीतिक गर्मी आज चरम पर है। सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की आठ विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को मतदान हुआ था, जिनके नतीजे आज सामने आएंगे। इन उपचुनावों को कई राज्यों में सत्तारूढ़ दलों की प्रतिष्ठा और विपक्ष की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि इनमें नेताओं के निधन और कानूनी अयोग्यता जैसी परिस्थितियों में रिक्त हुईं महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं।
झारखंड की घाटशिला सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी। इस सीट पर 74.63% मतदान हुआ। सोरेन परिवार का यह गढ़ अब किस ओर झुकेगा, इस पर सभी की नज़रें हैं।
पंजाब की तरनतारन सीट आम आदमी पार्टी के विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के चलते खाली हुई थी। उपचुनाव में 60.95% मतदान दर्ज किया गया। पंजाब में AAP सरकार के प्रदर्शन और स्थानीय मुद्दों ने इस सीट को खासा राजनीतिक महत्व दिया है।
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राजस्थान की अंता सीट पर 80.32% की भारी मतदान प्रतिशतता ने मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। यह सीट भाजपा के कंवरलाल मीणा की सजा के बाद रिक्त हुई थी, जिससे पार्टी की साख दांव पर लग गई है। इस उपचुनाव में विपक्ष ने भी पूरी ताकत झोंक दी।
ओडिशा की नुआपाड़ा सीट पर बीजेडी विधायक राजेंद्र ढोलकिया के निधन के बाद उपचुनाव हुआ। 79.41% मतदान के साथ यह सीट ओडिशा के सबसे सक्रिय निर्वाचन क्षेत्रों में एक रही है। यहां बीजेडी के लिए यह सीट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
हैदराबाद की जुबली हिल्स सीट पर 48.47% मतदान हुआ। विधायक मंगलटी गोपीनाथ के निधन से खाली हुई इस सीट की खासियत यह रही कि चुनाव अभियान में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कांग्रेस के लिए वोट मांगते नज़र आए। इससे पूरे राज्य में नई राजनीतिक चर्चा छिड़ गई।
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मिजोरम की डम्पा सीट पर 82.34% मतदान हुआ, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। यहां एमएनएफ विधायक के निधन के बाद उपचुनाव हुए थे। इस सीट पर ग्रामीण मतदाताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने सभी को चौंका दिया।
बड़गाम सीट उमर अब्दुल्ला द्वारा छोड़े जाने के बाद रिक्त हुई थी, जहां 50.02% मतदान दर्ज हुआ। वहीं नगरोटा सीट, जो BJP के कब्जे में थी, जो विधायक के निधन के बाद खाली हुई और यहां 75.08% मतदान हुआ। दोनों सीटों के नतीजे राज्य की राजनीतिक दिशा बताने वाले साबित हो सकते हैं।