
रूस-ईरान ने प्रतिबंधों पर उठाए सवाल (Source- X)
New Delhi: ब्रिक्स समिट में रूस और ईरान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों पर खुलकर निशाना साधा। दोनों देशों ने प्रतिबंधों और सैन्य दबाव की आलोचना करते हुए ब्रिक्स देशों से ऐसी रणनीति बनाने की अपील की, जिससे समूह बाहरी दबावों का सामना कर सके। इन बयानों ने मेजबान भारत के सामने एक अहम कूटनीतिक चुनौती भी खड़ी कर दी है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। उनके मुताबिक अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण हाल के महीनों में दबाव और गंभीर हुआ है।
उन्होंने कहा कि किसी देश के व्यापार, ऊर्जा ढांचे या वित्तीय व्यवस्था पर राजनीतिक और सैन्य दबाव का असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। पेजेशकियन ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख आधार बताते हुए ब्रिक्स में ईरान की रणनीतिक भूमिका पर जोर दिया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश अपना पुराना वैश्विक दबदबा कायम रखने के लिए आर्थिक और सैन्य दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुतिन ने औद्योगिक और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने, अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों में बाधा और प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई।
रूस ने व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स के लिए नए निवेश प्लेटफॉर्म की जरूरत बताई। पुतिन ने ट्रांस-आर्कटिक और नॉर्थ-साउथ इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे मार्गों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
सिंहासन पर विराजे मुंबई के विघ्नहर्ता: लालबागचा राजा का पहला लुक आउट, इस बार इको-फ्रेंडली टच भी खास
रूस और ईरान के बयानों के बीच भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ब्रिक्स को ऐसा मंच बनाए रखना है जहां अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन बना रहे। भारत की विदेश नीति लंबे समय से कई शक्तियों के साथ समानांतर और लचीले संबंध रखने पर आधारित रही है।
दूसरी ओर, चीन ब्रिक्स के भीतर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने में रुचि दिखाता रहा है। ऐसी पहलें पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था और डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली के प्रभाव को चुनौती दे सकती हैं।
रूस ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, शुरुआती 10 अरब डॉलर के री-इंश्योरेंस पूल और न्यू डेवलपमेंट बैंक के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की वकालत की। ईरान ने भी ऊर्जा, खाद्य और परिवहन आपूर्ति श्रृंखला में ब्रिक्स के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
ऐसे में भारत के सामने चुनौती सिर्फ समिट की मेजबानी तक सीमित नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़े, लेकिन समूह की छवि किसी एक देश या पश्चिमी देशों के विरोध के मंच के रूप में न उभरे।
Location : New Delhi
Published : 12 September 2026, 12:34 PM IST
Topics : BRICS Global Politics India iran Russia