
भारत के Nuclear Program की रखी नींव( AI Generated ig)
New Delhi: भारत के महान वैज्ञानिकों में शामिल डॉ. होमी जहांगीर भाभा की आज 30 अक्टूबर को जयंती है। उन्हें भारत के Nuclear Programme को जन्म देना वाला कहा जाता है। उन्होंने ऐसे समय में देश को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का सपना देखा, जब भारत आजाद भी नहीं हुआ था। उनका मानना था कि अगर भारत को दुनिया के विकसित देशों की बराबरी करनी है तो उसे विज्ञान और तकनीक में खुद मजबूत बनना होगा। उन्होंने अपनी मेहनत और दूर की सोच से इस सपने को पूरा करने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए।
होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई में एक पढ़े-लिखे पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता जहांगीर होर्मुसजी भाभा वकील थे। बचपन से ही होमी पढ़ाई में काफी तेज थे। उन्हें गणित और विज्ञान में खास दिलचस्पी थी। परिवार चाहता था कि वह इंजीनियर बनें, इसलिए साल 1927 में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड की Cambridge University भेजा गया। शुरुआत में उन्होंने Mechanical Engineering की पढ़ाई की, लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि Physics में बढ़ने लगी। इसके बाद उन्होंने इसी विषय में Research करना शुरू कर दिया और साल 1934 में P.H.D की डिग्री हासिल की।
2nd World War के दौरान वह भारत लौट आए। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में काम करना शुरू किया। यहां उन्होंने महान वैज्ञानिक C.V Raman के साथ भी काम किया। भाभा का सपना था कि भारत में भी ऐसी संस्थाएं बनें, जहां दुनिया के बड़े वैज्ञानिकों की तरह Research किया जा सके। इसी सोच के साथ साल 1945 में उन्होंने मुंबई में TATA Institute of Fundamental Research (TIFR) की स्थापना की। यह संस्थान आगे चलकर देश में विज्ञान और Nuclear Research का बड़ा Centre बना।
TATA Institute of Fundamental Research (TIFR) की स्थापना की( AI Generated ig )
होमी भाभा ने देश में Nuclear Energy के विकास को बहुत जरूरी माना। उनका मानना था कि Nuclear Energy का इस्तेमाल बिजली बनाने और देश की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। साल 1948 में भारत के Nuclear Energy आयोग का गठन हुआ और भाभा इसके पहले अध्यक्ष बने। साल 1954 में उन्होंने मुंबई के ट्रॉम्बे में Nuclear Research Centre की स्थापना की। आज यही संस्थान भाभा Nuclear Research Centre (BRC) के नाम से जाना जाता है। उन्होंने देश में वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी तैयार करने पर भी जोर दिया
होमी भाभा सिर्फ वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि उन्हें Art, Singing, Painting और खूबसूरत इमारतों का भी शौक था। वह चित्रकारी में रुचि रखते थे और भारतीय कला को बढ़ावा देना चाहते थे। TIFR की इमारत और वहां मौजूद कलाकृतियों में उनकी इस पसंद की झलक देखने को मिलती है। साल 1954 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
24 जनवरी 1966 को होमी जहांगीर भाभा एक विमान हादसे में इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनका विमान France के Mont Blanc पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 56 साल थी। उनके निधन से भारतीय विज्ञान जगत को बड़ा नुकसान हुआ। उनके सम्मान में ट्रॉम्बे स्थित Atomic Research Centre का नाम बदलकर Bhabha Atomic Research रखा गया। आज भी भारत के Nuclear Program और Scientific Oraganizations में उनका योगदान याद किया जाता है। उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि बड़े सपने और मजबूत इरादे किसी भी देश की तस्वीर बदल सकते हैं
Location : New Delhi
Published : 30 October 2026, 10:05 AM IST
Topics : Father Of Indian Nuclear Programme Father Of Indian Nuclear Science Homi Jehangir Bhabha Tribute To Homi Bhabha