डिजिटल प्राइवेसी बनाम प्रेस की आजादी! DPDP कानून पर सरकार ने बातचीत के दरवाजे खोले

डिजिटल डेटा प्राइवेसी कानून यानी DPDP एक्ट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संपादकों से खुली बातचीत करने की पहल की है।

Updated : 28 October 2026, 8:39 PM IST

नई दिल्ली: डिजिटल डेटा प्राइवेसी कानून यानी DPDP एक्ट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संपादकों से खुली बातचीत करने की पहल की है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संपादकीय नेतृत्व से चर्चा का न्योता देते हुए कहा कि सरकार का पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान से मिली प्रेस की आजादी सुरक्षित है और पत्रकारों की चिंताओं के समाधान के लिए सरकार सुझावों पर विचार करने को तैयार है।

सरकार की यह पहल सुप्रीम कोर्ट की ओर से DPDP कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और DPDP रूल्स, 2025 को चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कानून मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जवाब मांगा था।

सुझावों पर चर्चा

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता संविधान से मिली है और इसे सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि DPDP कानून निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर तैयार किया गया है और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ था। सरकार ने दोहराया कि वह पत्रकारों और संपादकों की ओर से दिए जाने वाले सुझावों पर चर्चा के लिए तैयार है।

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क्या है DPDP एक्ट?

संसद ने अगस्त 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पारित किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल माध्यमों पर लोगों के निजी डेटा की सुरक्षा करना है। यह भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण से जुड़ा व्यापक कानून है। इसके तहत व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं को डेटा फिड्यूशियरी कहा गया है। ऐसी संस्थाएं आम तौर पर संबंधित व्यक्ति की सहमति या कानून में निर्धारित वैध उद्देश्यों के तहत ही उसके निजी डेटा का प्रसंस्करण कर सकती हैं।

कानून की धारा 7 में कुछ ऐसे वैध उद्देश्यों का उल्लेख है, जिनके तहत निर्धारित शर्तों के साथ व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 13 नवंबर 2025 को DPDP नियम अधिसूचित किए थे। इनका क्रियान्वयन 18 महीने की अवधि में अलग-अलग चरणों में किया जाना निर्धारित है।

अब इस कानून को लेकर सरकार और संपादकों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि डिजिटल निजता की सुरक्षा और खोजी पत्रकारिता समेत प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  28 October 2026, 8:39 PM IST