असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। जुबीन गर्ग से जुड़ा भावनात्मक मुद्दा, बेदखली अभियान, NRC-CAA विवाद, महिला मतदाताओं पर असर और कल्याण बनाम बेरोजगारी जैसे कारक चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

जुबीन गर्ग से NRC तक- असम में मुद्दों का तूफान (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Guwahati: असम में 9 अप्रैल को होने वाले एक चरण के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बेहद गरम हो चुका है। 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए यह मुकाबला अब सिर्फ विकास के एजेंडे तक सीमित नहीं है, बल्कि पहचान, नागरिकता, सामाजिक न्याय और जमीन से जुड़े विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित हो गया है। राज्य में लागू आदर्श आचार संहिता के बीच सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को धार दे रहे हैं।
प्रसिद्ध कलाकार Zubeen Garg की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई मौत ने चुनावी माहौल को भावनात्मक बना दिया है। राज्य सरकार ने मामले की सुनवाई तेज करने के लिए विशेष अदालत का सहारा लिया है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। जुबीन गर्ग की लोकप्रियता को देखते हुए यह मुद्दा खासकर युवाओं और 'खामोश मतदाताओं" को प्रभावित कर सकता है।
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मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व वाली सरकार अपने बेदखली अभियानों को 'मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा' के रूप में पेश कर रही है। सरकार का दावा है कि उसने जंगलों और धार्मिक स्थलों की जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। वहीं विपक्ष, खासकर कांग्रेस और AIUDF, इसे एक 'चयनात्मक कार्रवाई' और मानवीय संकट करार दे रहा है। यह मुद्दा अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में निर्णायक साबित हो सकता है।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का मुद्दा एक बार फिर चुनाव के केंद्र में है। भाजपा CAA को सताए गए अल्पसंख्यकों के लिए राहत के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि NRC के नाम पर असली नागरिकों को परेशान किया गया। यह बहस राज्य की पहचान और जनसांख्यिकी को लेकर मतदाताओं के रुख को प्रभावित कर रही है।
सरकार द्वारा POCSO कानून के तहत बाल विवाह के खिलाफ सख्त अभियान को एक बड़े सामाजिक सुधार के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। महिला मतदाताओं, जो कुल मतदाताओं का लगभग आधा हिस्सा हैं, पर इस मुद्दे का खास असर पड़ सकता है।
भाजपा "डबल इंजन सरकार" के तहत 'अरुणोदय योजना' जैसी योजनाओं, चाय-जनजाति समुदाय के लिए सहायता और रोजगार के दावों को चुनावी मुद्दा बना रही है। दूसरी ओर Gaurav Gogoi के नेतृत्व में कांग्रेस बेरोजगारी, बढ़ते कर्ज़ और असमान विकास को लेकर सरकार पर हमला बोल रही है।
अधिसूचना: 16 मार्च 2026
नामांकन की अंतिम तारीख: 23 मार्च 2026
मतदान: 9 अप्रैल 2026
मतगणना: 4 मई 2026
इन सभी कारकों के बीच असम का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है, जहाँ हर मुद्दा परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।