51 वार, नाले में मिली लाश… आखिर कौन था आईबी अफसर अंकित शर्मा का कातिल? कोर्ट के फैसले ने खोले 2020 दंगों के राज

दिल्ली के 2020 दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने हत्या, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में दोष सिद्ध माना, जबकि कुछ आरोपियों को बरी कर दिया। सजा पर फैसला जल्द होगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 July 2026, 11:52 AM IST

New Delhi: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुई इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने हत्या, दंगा, धार्मिक वैमनस्य फैलाने, घातक हथियार रखने और सामूहिक अपराध जैसी गंभीर धाराओं में दोष सिद्ध माना है। हालांकि, ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश और लोकसेवक के रूप में अपराध करने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने किन-किन को दोषी ठहराया?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद, अनस और एक अन्य आरोपी को दोषी ठहराया। वहीं हसीन उर्फ मुल्लाजी, फिरोज, गुलफाम, शोएब, समीर खान और मुंतजिम उर्फ मूसा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत दोषियों की सजा पर अलग से फैसला सुनाएगी।

51 वार और नाले में मिला था शव

अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान लापता हो गए थे। बाद में उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसमें खुलासा हुआ कि उनके शरीर पर धारदार हथियार से 51 वार किए गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंकित भीड़ को शांत करने और कानून हाथ में न लेने की अपील कर रहे थे, तभी उन्हें पकड़कर बेरहमी से मार डाला गया और शव नाले में फेंक दिया गया।

दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि

फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसक झड़पें हुई थीं। इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसी हिंसा के दौरान अंकित शर्मा की हत्या हुई, जिसके बाद उनके पिता की शिकायत पर दयालपुर थाने में मामला दर्ज किया गया।

AAP ने ताहिर हुसैन से बनाया दूरी

कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया कि ताहिर हुसैन का पार्टी से अब कोई संबंध नहीं है। पार्टी के अनुसार, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद 27 फरवरी 2020 को उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव में ताहिर हुसैन ने एआईएमआईएम के टिकट पर मुस्तफाबाद सीट से चुनाव लड़ा था।

दिल्ली पुलिस का बयान 

दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने कहा कि जांच टीम ने निष्पक्ष और सबूतों के आधार पर जांच की। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला इस बात का प्रमाण है कि जांच पेशेवर तरीके से की गई और 2020 के दंगों के दोषियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश सफल रही।

Location :  New Delhi

Published :  14 July 2026, 11:52 AM IST