गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: जानिए कैसे 18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट के दोषियों को अंजाम तक पहुंचाया गया

गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों की फांसी और 11 अन्य की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने पीड़ित परिवारों और घायलों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 July 2026, 1:23 PM IST

New Delhi: गुजरात हाई कोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए 38 दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। वहीं, 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा भी यथावत रखी गई है। अदालत ने अपने फैसले में साफ किया कि आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा।

पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवजा

हाई कोर्ट ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का भी आदेश दिया। अदालत ने 56 मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायल लोगों को 1-1 लाख रुपये देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को न्याय के साथ आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए।

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2008 में हुए थे सिलसिलेवार धमाके

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में करीब 70 मिनट के भीतर 20 अलग-अलग स्थानों पर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस घटना से पूरे शहर में दहशत फैल गई थी और इसे देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है।

जांच में सामने आए कई अहम तथ्य

जांच एजेंसियों ने मामले की गहन पड़ताल के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) का नाम सामने आया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और सबूतों के आधार पर विशेष अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।

दिल्ली धमाका मामले की जांच अलग जारी

इस बीच, नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। एजेंसी ने अदालत में फोरेंसिक रिपोर्ट पेश की है। इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। मामले में गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई है और अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। NIA के अनुसार, इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और पूरक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। जांच में हथियार और गोला-बारूद जुटाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, यह मामला अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस से अलग है और इसकी जांच स्वतंत्र रूप से जारी है।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश

गुजरात हाई कोर्ट का यह फैसला आतंकवाद के मामलों में सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्दोष लोगों की जान लेने वाले अपराधों में कानून किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा। साथ ही पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए मुआवजे का आदेश भी न्याय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

Location :  New Delhi

Published :  7 July 2026, 1:23 PM IST