2766 बसों में सिर्फ 32 दौड़ीं… मुंबई की लाइफलाइन क्यों थम गई? सामने आई पूरी कहानी

मुंबई में बेस्ट (BEST) कर्मचारियों की हड़ताल पर प्रशासन का सख्त रुख। मेस्मा (MESMA) के तहत हिंसक प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज करने की तैयारी। 2,700 से अधिक बसें डिपो में बंद, वैकल्पिक साधनों पर उमड़ी मुंबईकरों की भारी भीड़।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 June 2026, 1:48 PM IST

Mumbai: मुंबई की दूसरी सबसे बड़ी लाइफलाइन कही जाने वाली बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात (BEST) की बसों के पहिए थमने के बाद अब यह पूरा मामला कानूनी टकराव के एक नए मोड़ पर आ गया है। अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन पर अड़े कर्मचारियों के खिलाफ मुंबई पुलिस और प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

महाराष्ट्र अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 2023 (MESMA) के तहत इस हड़ताल को पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका है, लेकिन अब नया अपडेट यह है कि डिपो से निकलने वाली बसों को जबरन रोकने और उन पर पथराव करने वाले उपद्रवी प्रदर्शनकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही है। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद शनिवार को भी डिपो के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

6 बसों पर पथराव के बाद पुलिस का कड़ा हंटर

यह पूरा विवाद शुक्रवार सुबह उस समय और हिंसक हो गया जब आंदोलनकारी कर्मचारियों ने डिपो से बाहर निकल रही गाड़ियों को न सिर्फ रोका, बल्कि कुछ इलाकों में पथराव भी किया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कड़ी सुरक्षा के बीच सड़कों पर उतारी गई बसों में से 6 गाड़ियों को पत्थरों से शीशे टूटने और सुरक्षा कारणों के चलते वापस डिपो में बुलाना पड़ा।

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इसके बाद प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। मुंबई पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर उन लोगों की लिस्ट तैयार की है जिन्होंने ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को डराने-धमकाने की कोशिश की।

2,766 बसों के बेड़े में से महज 32 सड़कों पर, मुंबईकर बेहाल

इस अप्रत्याशित हड़ताल ने मायानगरी की रफ्तार को बुरी तरह थाम दिया है. बेस्ट के कुल 2,766 बसों के विशाल बेड़े में से शुक्रवार और शनिवार के बीच सिर्फ 38 बसें ही बाहर निकल सकीं, जिनमें से पथराव के कारण 6 को वापस लौटना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि 25 लाख दैनिक यात्रियों की सेवा में महज 32 बसें ही दौड़ पाईं।

बसों के पूरी तरह गायब होने से सबसे ज्यादा मार नौकरीपेशा वर्ग और स्कूली बच्चों पर पड़ी है। दादर, अंधेरी, बोरीवली और कुर्ला जैसे मुख्य बस टर्मिनस पर सुबह से ही ऑटो, टैक्सी और मेट्रो स्टेशनों पर भारी और अनियंत्रित भीड़ देखी जा रही है, जिसका फायदा उठाकर कई निजी वाहन चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं।

वेट-लीज (Wait-Lease) मॉडल पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस हड़ताल ने बेस्ट के आंतरिक ढांचे की उस कमजोरी को भी उजागर कर दिया है, जिस पर लंबे समय से बहस चल रही थी। दरअसल, बेस्ट के पास मौजूद 2,766 बसों में से केवल 249 बसें ही उसकी अपनी हैं, जबकि बाकी की सभी बसें निजी ठेकेदारों के जरिए 'वेट-लीज मॉडल' पर चलाई जा रही हैं। आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की मुख्य मांग इसी ठेका प्रथा को खत्म कर सभी संविदा कर्मियों को नियमित सेवा में शामिल करने की है।

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इसके अलावा, कर्मचारी यूनियनों की जिद है कि बेस्ट के बजट को पूरी तरह से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुख्य बजट में विलय किया जाए ताकि उनकी सैलरी और पेंशन सुरक्षित हो सके। जब तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाए का एकमुश्त भुगतान नहीं होता, तब तक गतिरोध टूटना मुश्किल नजर आ रहा है।

Location :  Mumbai

Published :  20 June 2026, 1:48 PM IST