मराठा आरक्षण पर फिर गरमाया महाराष्ट्र, मनोज जरांगे के आमरण अनशन से बढ़ी सरकार की चुनौती

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा फिर गरमा गया है। मनोज जरांगे पाटिल ने कुणबी प्रमाणपत्र और आरक्षण की अन्य मांगों को लेकर दोबारा आमरण अनशन शुरू किया है। वह मुंबई में आंदोलन की तैयारी में हैं, जबकि पुलिस ने अनुमति देने से इनकार किया है। सरकार प्रक्रिया में तेजी का दावा कर रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 3:00 PM IST

Mumbai: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमाता दिख रहा है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी मांगों को लेकर महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दोबारा आमरण अनशन शुरू कर दिया है। जरांगे मराठा समाज के पात्र लोगों को ओबीसी श्रेणी के तहत कुणबी प्रमाणपत्र देने समेत आरक्षण से जुड़ी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

कुणबी प्रमाणपत्र को लेकर सबसे बड़ा दबाव

मनोज जरांगे की प्रमुख मांग है कि मराठा समुदाय के पात्र लोगों को ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र जारी किया जाए। इसके जरिए उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का रास्ता साफ करने की मांग की जा रही है।

आंदोलनकारियों की दलील है कि हैदराबाद और सतारा गजेटियर समेत पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुणबी प्रमाणपत्र दिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर जरांगे पहले भी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं।

सरकार का दावा- प्रक्रिया में तेजी

वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि जाति सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि पात्र लोगों को नियमों के तहत प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इसके बावजूद जरांगे का आंदोलन दोबारा शुरू होने से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। आरक्षण के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

मुंबई कूच की तैयारी, पुलिस ने नहीं दी अनुमति

आमरण अनशन के साथ जरांगे ने मुंबई में आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी है। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए मुंबई में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है।

ऐसे में अब सवाल यह है कि जरांगे का अगला कदम क्या होगा और सरकार इस आंदोलन को शांत कराने के लिए किस तरह आगे बढ़ेगी। आंदोलन के पिछले अनुभवों को देखते हुए प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

तीन साल से लगातार आंदोलन के केंद्र में आरक्षण

मराठा आरक्षण का मुद्दा पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में मनोज जरांगे के नेतृत्व में कई बार आमरण अनशन, आंदोलन और महामोर्चे हो चुके हैं। इन आंदोलनों ने राज्य की राजनीति और सरकार दोनों पर दबाव बनाया है।

अब एक बार फिर आमरण अनशन शुरू होने के बाद मराठा आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत और जरांगे के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी।

Location :  Mumbai

Published :  15 September 2026, 3:00 PM IST