
इमरान खान को बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई फटकार (Image Source: Internet)
Mumbai: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक और अभिनेता इमरान खान को राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन का मौलिक अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त है, जबकि ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक इस अधिकार का दावा नहीं कर सकते। अदालत की तल्ख टिप्पणियों के बाद अभिनेता को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इमरान खान बचपन से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने यहीं काम किया और इसी देश से उन्हें पहचान मिली। इसके बावजूद वह भारतीय नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों का दावा नहीं कर सकते।
पीठ ने सवाल उठाया कि भारतीय नागरिकों से जुड़े चुनावी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अभिनेता को क्या अधिकार है? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से उनका क्या संबंध है?
सुनवाई के दौरान अदालत ने दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए पूछा कि यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में इसी तरह के राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होता तो क्या वहां उसे स्वीकार किया जाता? पीठ ने टिप्पणी की कि अमेरिका में ऐसी घटना होने पर संबंधित व्यक्ति को अगली उड़ान से भारत वापस भेज दिया जाता।
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अदालत ने कहा कि OCI कार्डधारक होने के नाते इमरान खान भारत की उदारता पर निर्भर हैं। यदि उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की इतनी इच्छा है तो उन्हें भारतीय नागरिकता लेने पर विचार करना चाहिए। पीठ ने इस दौरान विदेशी नागरिकों के अधिकारों और भारतीय नागरिकों को मिलने वाले मौलिक अधिकारों के बीच अंतर भी स्पष्ट किया।
सुनवाई के दौरान अभिनेता के वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत में वचनपत्र दाखिल किया। इसमें आश्वासन दिया गया कि इमरान खान भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाएंगे।
हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वचनपत्र देना पर्याप्त नहीं है और अभिनेता को बिना शर्त माफी भी मांगनी होगी। इसके बाद इमरान खान की ओर से अदालत में माफी पेश की गई। पीठ ने अधिकारियों से भी मामले में उदारता दिखाने की अपील की।
अदालत ने कहा कि इमरान खान बचपन से भारत में रह रहे हैं और उन्हें एक अवसर दिया जाना चाहिए। पीठ ने भारत की वसुधैव कुटुंबकम की भावना का उल्लेख करते हुए उदारता बरतने की बात कही। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत सरकार के पास विदेशी नागरिकों को देश से निर्वासित करने की संप्रभु शक्ति है। फिलहाल अभिनेता को राहत देते हुए भारत छोड़ने के नोटिस पर लगी रोक सात दिसंबर तक बढ़ा दी गई है।
Location : Mumbai
Published : 2 November 2026, 9:45 PM IST