प्यार सिर्फ फिल्मों का रोमांस नहीं और शादी सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं। जानिए प्यार का असली मतलब और शादी की हकीकत, जहां सम्मान, समझ और सपोर्ट से ही रिश्ता मजबूत बनता है।

वेलेंटाइन दिन
New Delhi: जब भी हम प्यार (Love) के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर दिमाग में फिल्मों की चमक-दमक वाली तस्वीरें उभर आती हैं। बारिश में भीगते कपल्स, बैकग्राउंड में रोमांटिक गाने, शर्माती निगाहें और बड़े-बड़े डायलॉग्स। लेकिन असल ज़िंदगी का प्यार इन सब से काफी अलग होता है। प्यार सिर्फ फीलिंग्स या आकर्षण नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता है जो समय के साथ गहराता और परिपक्व होता है।
प्यार का मतलब सिर्फ “I Love You” कहना नहीं है। असली प्यार तब दिखता है जब आपके पार्टनर की खुशी आपकी खुशी बन जाए, जब उसकी परेशानी आपको बेचैन कर दे और जब बिना बोले ही आप उसकी जरूरतें समझने लगें। प्यार में केयर, रिस्पेक्ट और इमोशनल सपोर्ट सबसे अहम होते हैं। यह एक-दूसरे को बदलने की कोशिश नहीं, बल्कि एक-दूसरे को अपनाने की कला है।
जब प्यार होता है, तो सब कुछ परफेक्ट लगता है। लेकिन शादी (Marriage) के बाद ज़िंदगी की असली जिम्मेदारियां सामने आती हैं। शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी रिश्ता होती है। आपकी लाइफस्टाइल, आदतें, प्राथमिकताएं और सोच कई बार बदल जाती हैं। यहां सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि समझदारी, सब्र और एडजस्टमेंट की जरूरत होती है।
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प्यार में अक्सर जिम्मेदारियां कम होती हैं, इसलिए सब कुछ आसान लगता है। वहीं शादी में हर फैसला मिलकर लेना पड़ता है।
कई अरेंज मैरिज में प्यार धीरे-धीरे पनपता है। ऐसा बिल्कुल संभव है। लेकिन बिना प्यार, सम्मान और समझ के शादी को निभाना मुश्किल हो सकता है। वहीं लव मैरिज में भी अगर केयर, समझ और रिस्पेक्ट नहीं रही, तो वक्त के साथ प्यार फीका पड़ सकता है।
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