
भारतवंशी जेन-जी और अमेरिकी शिक्षक ने सुलझाई गणित की गुत्थी (Img: AI Generated Image)
New Delhi: गणित की दुनिया में कुछ सवाल ऐसे होते हैं, जिनका जवाब खोजने में दशकों बीत जाते हैं। ऐसा ही एक मुश्किल सवाल करीब 90 वर्षों से गणितज्ञों के सामने चुनौती बना हुआ था। अब इस पहेली को सुलझाने का दावा 22 वर्षीय भारतवंशी छात्रा वसुधा भरतराम और प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ. जोन बिरमन की जोड़ी ने किया है।
इस कहानी की शुरुआत करीब सात साल पहले हुई थी। तब वसुधा सिर्फ 15 साल की थीं और हाई स्कूल में पढ़ती थीं। उन्होंने गणित में दिलचस्पी बढ़ने के बाद डॉ. बिरमन को ईमेल किया। उस समय बिरमन कोलंबिया यूनिवर्सिटी से रिटायर हो चुकी थीं और टोपोलॉजी की विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना चुकी थीं।
वसुधा ने अपने ईमेल में लिखा था कि उन्होंने पहली बार गणितीय प्रूफ पढ़ा है और उन्हें महसूस हुआ कि गणित स्कूल की किताबों में पढ़ाई जाने वाली चीजों से कहीं बड़ा विषय है। उन्होंने डॉ. बिरमन से पूछा कि क्या वह उन्हें वह गणित सिखा सकती हैं, जो वह अभी तक नहीं सीख पाई हैं।
डॉ. बिरमन ने इस अनुरोध को गंभीरता से लिया और वसुधा को मिलने के लिए बुलाया। उन्होंने किशोरी को उन्नत गणित की एक कठिन किताब दी। यहीं से दोनों के बीच सीखने और शोध का सिलसिला शुरू हुआ।
जिस समस्या को दोनों ने सुलझाया, उसका संबंध Braid Theory से है। इसे आसान भाषा में समझें तो इसमें एक-दूसरे के ऊपर से गुजरते हुए आपस में उलझे धागों की संरचना का गणितीय अध्ययन किया जाता है। बालों की चोटी इसका एक सामान्य उदाहरण है। गणितज्ञ इन उलझी हुई संरचनाओं को बीजगणितीय समीकरणों में बदलकर उनका अध्ययन करते हैं। असली सवाल यह था कि चार धागों वाली ऐसी संरचना को गणितीय रूप में बदलने के बाद क्या उसकी मूल पहचान सुरक्षित रहती है या नहीं।
तीन धागों के मामले में इस सवाल का जवाब पहले ही मिल चुका था, जबकि पांच या उससे अधिक धागों के लिए अलग नतीजे सामने आ चुके थे। लेकिन चार धागों का मामला दशकों तक अनसुलझा रहा। यही वजह थी कि इस समस्या को गणित की दुनिया की बेहद कठिन पहेलियों में गिना जाता था। अब वसुधा और बिरमन के काम ने इस लंबे इंतजार को खत्म करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
इस समस्या को हल करने की कोशिश सिर्फ इंसानों ने नहीं की। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ इमैनुएल ब्रुइलार्ड भी उन्नत AI और सुपरकंप्यूटर की मदद से इस पहेली पर काम कर रहे थे। इसके बावजूद समाधान की दिशा में निर्णायक सफलता वसुधा और बिरमन की जोड़ी से आई। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के गणित विभाग के प्रमुख डेविड गबाई ने इस उपलब्धि की तुलना गणित के इतिहास की एक मशहूर घटना से की, जब जीएच हार्डी ने युवा भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा को पहचाना था।
Location : New Delhi
Published : 7 September 2026, 4:09 PM IST