
देश के वीर जवान (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
New Delhi: भारतीय सेना को दुनिया की सबसे अनुशासित और मजबूत सेनाओं में गिना जाता है। लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, जवानों की कड़ी ट्रेनिंग और चुनिंदा प्रक्रिया। सेना में भर्ती होने से लेकर पोस्टिंग तक का सफर न सिर्फ शारीरिक रूप से थकाने वाला होता है बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। एक सिविलियन को फौलादी जवान में बदलने के लिए सेना उसे तपाकर तैयार करती है।
सेना में भर्ती मुख्यतः रिटन टेस्ट, फिजिकल टेस्ट और मेडिकल टेस्ट के आधार पर की जाती है। हर साल अग्निवीर भर्ती रैली, एनडीए परीक्षा, टेक्निकल एंट्री स्कीम और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से देशभर के युवा सेना में शामिल होते हैं।
उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर आवेदन करते हैं।
इसके बाद रिटन परीक्षा होती है (सीईई - Common Entrance Exam)।
इसमें दौड़ (1.6 किमी), पुल-अप, बीम टेस्ट, बैलेंसिंग आदि शामिल होते हैं।
यह चरण बेहद कठिन होता है क्योंकि इसमें शारीरिक दक्षता की असली परीक्षा होती है।
आंखों की रोशनी, हाइट, वजन, छाती, दांत, शरीर के किसी रोग का परीक्षण किया जाता है।
मेडिकल अनफिट होने पर उम्मीदवार बाहर कर दिया जाता है या री-मेडिकल की सुविधा मिलती है।
परीक्षा और टेस्ट के आधार पर मेरिट लिस्ट बनती है।
सफल उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है।
सेना की ट्रेनिंग को देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग में गिना जाता है। यह 20 से 34 सप्ताह की होती है, जो विभिन्न रैंक्स और पदों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सैनिक का सफर (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
Infantry Training Centre (जम्मू, बेलगाम)
Artillery Centre (नासिक, देवलाली)
Engineers Training Centre (पुणे)
Officers Training Academy (OTA) (चेन्नई, गया)
सुबह 3:30-4 बजे तक उठना
5:30 से फिजिकल एक्सरसाइज: दौड़, पुश-अप, रोप क्लाइम्बिंग
8 बजे से ड्रिल, वेपन ट्रेनिंग, मैप रीडिंग, फील्ड क्राफ्ट
2 बजे तक लंच और थोड़ा आराम
शाम 4 बजे तक ग्राउंड ड्यूटी और सफाई
6 बजे तक स्पोर्ट्स: फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी
8 बजे डिनर और फिर विश्राम
इस दौरान मानसिक मजबूती, अनुशासन, टीम वर्क और देशभक्ति की भावना को भी विकसित किया जाता है।
जब ट्रेनिंग पूरी हो जाती है, तब जवानों की क्षमता के अनुसार उन्हें विभिन्न यूनिट्स और मोर्चों पर पोस्ट किया जाता है। कुछ जवान हिमालय की ऊंचाई पर तैनात होते हैं तो कुछ रेगिस्तान की तपन में। वहीं कुछ जवान नक्सल प्रभावित इलाकों, बॉर्डर पोस्ट, या शांति मिशन में तैनात किए जाते हैं। यदि कोई जवान ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाता, तो उसकी ट्रेनिंग दोबारा करवाई जाती है, जब तक कि वह मानकों पर खरा न उतर जाए।
भारतीय सेना का हिस्सा बनना आसान नहीं है, लेकिन यह जीवन का सबसे गर्वपूर्ण सफर होता है। यह केवल एक नौकरी नहीं बल्कि एक सेवा, बलिदान और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। जो युवा इसे अपनाते हैं, वे वाकई देश के रियल हीरो होते हैं।
Location : New Delhi
Published : 15 August 2025, 1:20 PM IST