
ताइवान एयरलाइंस विवाद में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी (Img: X)
New Delhi: पाकिस्तान एक बार फिर चीन से अपनी नजदीकी और "वन चाइना" पॉलिसी के सपोर्ट को लेकर चर्चा में है। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में पाकिस्तान ने ताइवान की दो बड़ी एयरलाइंस, चाइना एयरलाइंस और EVA एयर को अपने एयरस्पेस से उड़ने से बैन कर दिया था। इस फैसले के कुछ ही समय बाद दोनों एयरलाइंस को फिर से पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की इजाज़त मिल गई। भारतीय स्ट्रेटेजिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इस डेवलपमेंट को लेकर पाकिस्तान की पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं।
डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पाकिस्तान खुद चीन से ज्यादा चीन के प्रति वफ़ादार होने का दिखावा करता है। उन्होंने इस ट्रेंड को ताइवानी एयरलाइंस पर अचानक लगे बैन की वजह बताया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने "वन चाइना" पॉलिसी का हवाला देते हुए ताइवानी एयरलाइंस को अपने एयरस्पेस से उड़ने से कुछ समय के लिए बैन कर दिया था। हालांकि, बाद में दोनों एयरलाइंस को फिर से उड़ने की इजाजत दे दी गई।
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इस डेवलपमेंट में एक जरूरी बात यह है कि चीन खुद ताइवानी एयरलाइंस को अपने एयरस्पेस से उड़ने की इजाजत देता है। चाइना एयरलाइंस और EVA एयर जैसी कंपनियां इंटरनेशनल फ्लाइट्स चलाती हैं। इस आधार पर डॉ. चेलानी ने पाकिस्तान के फैसले को बेतुका बताया। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल सिविल एविएशन में एयर रूट्स का इस्तेमाल टेक्निकल और ऑपरेशनल अरेंजमेंट्स से तय होता है। इसलिए "वन चाइना" पॉलिसी के आधार पर ताइवानी कमर्शियल एयरलाइंस पर बैन लगाना एक अजीब कदम था।
इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने 28 अक्टूबर को चाइना एयरलाइंस और EVA एयर को 27 मार्च, 2027 तक अपने एयरस्पेस से उड़ान भरने की परमिशन दी। इससे पहले पाकिस्तानी डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान का एविएशन डिपार्टमेंट "वन चाइना" पॉलिसी को मानता है और सिर्फ मेनलैंड चाइना की एयरलाइंस को ही परमिशन देता है।
हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से कथित सस्पेंशन और बाद में परमिट फिर से शुरू करने के कारणों के बारे में कोई डिटेल्ड ऑफिशियल एक्सप्लेनेशन जारी नहीं किया गया। पाकिस्तान के ऑफिशियल परमिट डॉक्यूमेंट्स में भी पहले सस्पेंशन का कोई जिक्र नहीं था।
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डॉ. चेलानी के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी इंटरनेशनल प्रोफाइल को मजबूत करने और स्ट्रेटेजिक सपोर्ट पाने के लिए चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इसलिए इस्लामाबाद कभी-कभी बीजिंग के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए ज्यादा सख़्त रवैया अपनाता है। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते को डिप्लोमैटिक और स्ट्रेटेजिक फायदों के नजरिए से देखता है, जबकि पाकिस्तान इस पार्टनरशिप को अपने बने रहने के लिए बहुत जरूरी मानता है। पाकिस्तान ने अक्सर चीन के साथ अपने रिश्ते को "हर मौसम में काम आने वाली स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप" और "कभी न टूटने वाला भाईचारा" जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके बताया है।
"वन चाइना" पॉलिसी चीन का डिप्लोमैटिक रवैया है, जिसके तहत बीजिंग ताइवान को अपने इलाके का हिस्सा मानता है और उम्मीद करता है कि दूसरे देश चीनी सरकार को ही एकमात्र सही सरकार के तौर पर मान्यता देंगे। हालांकि, अलग-अलग देश अपने डिप्लोमैटिक रिश्तों के आधार पर इस पॉलिसी का मतलब निकालते हैं। 1949 में चीनी सिविल वॉर के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने मेनलैंड चीन पर कब्जा कर लिया, जिससे पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना। हारी हुई नेशनलिस्ट सरकार ताइवान भाग गई और वहां अपनी सरकार बना ली। तब से चीन और ताइवान अलग-अलग एडमिनिस्ट्रेशन के तहत काम कर रहे हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स बीजिंग के साथ फॉर्मल डिप्लोमैटिक रिलेशन रखता है, लेकिन ताइवान के साथ इनफॉर्मल रिलेशन और सिक्योरिटी कोऑपरेशन जारी रखता है। इसलिए "वन चाइना" पॉलिसी को मानने वाले देशों में भी ताइवान के साथ रिलेशन और बिहेवियर को लेकर अलग-अलग अरेंजमेंट हैं।
Location : New Delhi
Published : 6 November 2026, 12:52 PM IST