कर्ज के जाल में अमेरिका: हर दिन 3.8 अरब डॉलर सिर्फ ब्याज भरने में हो रहे खर्च, क्या महाशक्ति की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है?

अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुँच गया है। पिछले एक दशक में दोगुना हुए इस कर्ज का बोझ अब हर नागरिक पर 1.20 लाख डॉलर के करीब है। बढ़ती उम्र और सरकारी खर्चों के चलते यह स्थिति भविष्य के लिए बड़ा आर्थिक खतरा बनी हुई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 August 2026, 9:05 AM IST

New York: वैश्विक महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 लाख करोड़ डॉलर (40 ट्रिलियन डॉलर) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है। महज एक दशक पहले जो कर्ज लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर हुआ करता था, वह दोगुना होकर अब इस मुकाम पर पहुंच गया है। इस वित्तीय संकट ने अमेरिकी नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है।

राजनीतिक दूरदर्शिता की कमी या नीतिगत विफलता?

विश्लेषकों का मानना है कि कर्ज का यह पहाड़ रातोरात नहीं खड़ा हुआ है। इसके पीछे पिछले एक दशक में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और जो बाइडन दोनों के कार्यकालों के दौरान लिए गए बड़े नीतिगत फैसले और भारी-भरकम खर्चे जिम्मेदार हैं।

आक्रामक खर्च और टैक्स में छूट: दोनों ही प्रशासनों के दौर में राहत पैकेजों और बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ, जिससे राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ता गया।

ब्याज चुकाने में भारी रकम: मौजूदा समय में अमेरिकी सरकार को केवल अपने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए हर दिन 3.80 अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।

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नागरिकों पर बोझ और भविष्य का डरावना अनुमान

इस बढ़ते कर्ज का सीधा असर अब आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में अमेरिका के प्रत्येक नागरिक पर औसतन 1,19,699 डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक) का कर्ज आ चुका है।

प्रसिद्ध वित्तीय निगरानी संस्था पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के सीईओ माइकल पीटरसन ने चेतावनी दी है कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो अगले मात्र छह वर्षों में अमेरिका का यह कर्ज 50 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू जाएगा। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गहरे संकट में धकेल रही है।

जनसांख्यिकीय बदलाव और सामाजिक सुरक्षा का दबाव

अमेरिकी कर्ज में बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे केवल राजनीतिक नीतियां ही नहीं, बल्कि देश का बदलता डेमोग्राफिक स्ट्रक्चर भी एक बड़ा कारण है:

तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी: अमेरिका में हर दिन लगभग 10,000 'बेबी बूमर्स' सेवानिवृत्त हो रहे हैं और वरिष्ठ नागरिकों की औसत आयु बढ़ रही है।

मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी पर दबाव: संघीय सरकार को सामाजिक सुरक्षा और मेडिकेयर योजनाओं के तहत लगातार अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है, जबकि इस तंत्र को संभालने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक संसाधन और कर्मचारी नहीं हैं।

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अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चेतावनी

वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, हालात इतने चिंताजनक हैं कि पिछले महज पांच महीनों के भीतर ही राष्ट्रीय कर्ज में 1 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते अमेरिकी प्रशासन ने अपनी राजकोषीय नीतियों में बड़े बदलाव नहीं किए, तो यह आर्थिक संकट ग्लोबल मार्केट को भी अपनी चपेट में ले सकता है।

Location :  New York

Published :  21 August 2026, 9:05 AM IST