अमेरिका डीजल निर्यात पर लगाएगा प्रतिबंध? दुनिया भर में मचेगा ईंधन का हाहाकार: भारत में लोगों की जेब पर पड़ेगी मंहगाई की मार

अमेरिका रोक सकता है डीजल का निर्यात! डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू कीमतें घटाने के लिए 13 लाख बैरल दैनिक निर्यात रोकने का किया समर्थन। जानिए भारत समेत दुनिया भर के फ्यूल मार्केट पर इसका क्या पड़ेगा असर।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 September 2026, 8:48 AM IST

Washington: अमेरिका में डीजल की आसमान छूती कीमतों और रिकॉर्ड महंगाई के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सख्त और बड़े कदम का समर्थन किया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका से होने वाले डीजल निर्यात पर पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक लगाई जा सकती है। अमेरिका ने डीजल निर्यात पर रोक लगाई तो दुनिया में ईधन के लिए हाहाकार मचेगा और भारत में लोगों की जेब पर महंगाई की जबरदस्त मार पड़ेगी।

ट्रंप का मानना है कि अमेरिका रोजाना करीब 13 लाख बैरल डीजल दूसरे देशों को भेजता है, जो कि उसकी कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक चौथाई है। अगर इस डीजल को विदेश भेजने के बजाय अपने देश के घरेलू बाजार में रखा जाए, तो अमेरिकी नागरिकों को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से तुरंत राहत मिल सकती है।

इतिहास के उच्चतम स्तर पर डीजल के दाम

अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में डीजल की औसत कीमत 6.50 डॉलर प्रति गैलन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं।

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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी पुष्टि की है कि प्रशासन इस प्रस्ताव के कानूनी और आर्थिक पहलुओं का आकलन कर रहा है। हालांकि, सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि निर्यात रोकने से अमेरिका की अपनी तेल रिफाइनरियों के कामकाज और संचालन पर कोई बुरा असर न पड़े।

मिडिल ईस्ट संकट और रूस-यूक्रेन जंग से गहराया वैश्विक ईंधन संकट

वैश्विक स्तर पर डीजल की कमी का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष है। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस की प्रमुख तेल रिफाइनरियों पर ताबड़तोड़ ड्रोन हमले किए हैं।

दुनिया के सबसे बड़े डीजल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति घटी हुई है। ऐसे में अगर अमेरिका भी अपना 13 लाख बैरल दैनिक निर्यात बंद करता है, तो ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा जो अमेरिकी आपूर्ति पर निर्भर हैं।

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भारत समेत दुनिया भर पर पड़ेगा असर

अमेरिका के इस संभावित फैसले का असर केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की किल्लत होती है, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) और ईंधन की दरें तेजी से बढ़ेंगी।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने से पेट्रोलियम आयात बिल और माल ढुलाई (Freight/Transport Cost) का खर्च बढ़ जाएगा। इससे अंततः रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का सीधा दबाव आम जनता की जेब पर देखने को मिल सकता है।

Location :  Washington

Published :  23 September 2026, 8:47 AM IST