पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष अब होर्मुज और खार्ग जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका भारी सैन्य जमावड़ा कर दबाव बना रहा है, जबकि ईरान बारूदी सुरंगें बिछाकर जवाब दे रहा है। हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी खतरा मंडरा रहा है।

होर्मुज-खार्ग पर कब्जे की लड़ाई (Image Source: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में पिछले 28 दिनों से जारी सैन्य तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज और खार्ग जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गया है।
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए इन क्षेत्रों के आसपास भारी सैन्य जमावड़ा कर दिया है। हजारों सैनिकों के साथ नौसैनिक बेड़े और मरीन यूनिट्स को तैनात किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 50 हजार सैनिक पहले से मौजूद हैं, जबकि हजारों मरीन और पैराट्रूपर्स भी तैनाती के लिए तैयार हैं। ऐसा माना जा रहा है कि यह जमावड़ा सिर्फ सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने की रणनीति का हिस्सा है।
अमेरिकी दबाव के बीच ईरान भी पूरी ताकत से जवाब देने में जुटा है। ईरान ने खार्ग द्वीप के आसपास बारूदी सुरंगें बिछानी शुरू कर दी हैं और वहां अतिरिक्त सैनिकों के साथ वायु रक्षा तंत्र तैनात कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, ईरान ने संभावित लैंडिंग जोन के पास एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइंस बिछाई हैं, ताकि किसी भी जमीनी हमले को रोका जा सके। इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स भी लगाया जा रहा है, जो अब तक नहीं लिया जाता था।
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इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसेना कमांडर को मार गिराया है, हालांकि इसकी पुष्टि ईरान ने नहीं की है। वहीं, ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि किसी भी हमले का जवाब कड़े तरीके से दिया जाएगा।
तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए जल्द समझौता करने को कहा है, जबकि ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को पक्षपाती बताते हुए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का कहना है कि बातचीत सीधे नहीं, बल्कि कूटनीतिक चैनलों के जरिए चल रही है। वहीं, यमन के हाउती विद्रोहियों ने भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे ईरान के समर्थन में युद्ध में उतर सकते हैं।
अगर ऐसा होता है, तो बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी संघर्ष का नया केंद्र बन सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी बीच मिसाइल और ड्रोन हमले भी लगातार जारी हैं। यूएई और इजरायल में हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे आम लोगों की जान भी जा रही है।