पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को ठुकराते हुए शांति वार्ता के लिए 5 सख्त शर्तें रख दी हैं। वहीं, पाकिस्तान में संभावित बैठक की चर्चा तेज हो गई है। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों के बीच हालात और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प और मोजतबा खामेनेई (Image Source: Google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा जब ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ईरान ने साफ कर दिया कि किसी भी तरह की शांति वार्ता उसकी शर्तों पर ही संभव होगी।
ईरान ने पांच प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं, जिनमें सबसे अहम है सभी हमलों और हत्याओं को तुरंत बंद करना। इसके अलावा हर मोर्चे पर युद्ध खत्म करने, भविष्य में दोबारा संघर्ष न हो इसके लिए ठोस तंत्र बनाने, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और मुआवजा तय करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की मांग शामिल है। ईरान का कहना है कि जब तक इन शर्तों को नहीं माना जाएगा, तब तक किसी भी प्रकार की बातचीत का कोई मतलब नहीं है। इस रुख ने अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को फिलहाल झटका दिया है।
इस बीच अमेरिका अब बातचीत के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। जानकारी के मुताबिक, ईरान तक अमेरिकी प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए पहुंचाया गया है। अब कोशिश की जा रही है कि दोनों देशों के बीच आमने-सामने बातचीत कराई जाए।
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सूत्रों के अनुसार, यह संभावित बैठक पाकिस्तान में हो सकती है, जिसमें मिस्त्र के अधिकारी भी मध्यस्थता कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पहल को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं और जल्द ही बातचीत कराने की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक को लेकर इजरायल ने हैरानी जताई है, क्योंकि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में है। वहीं, सऊदी अरब और चीन जैसे देश इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के पक्ष में हैं।
जहां एक ओर शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमले लगातार जारी हैं। ईरान ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया है।
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इसके जवाब में इजरायल ने भी ईरान के कई अहम ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। खाड़ी देशों में भी तनाव बढ़ गया है, जहां ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने की कोशिशें की जा रही हैं। इसी के साथ अमेरिका भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। खबर है कि हजारों सैनिकों, पैराट्रूपर्स और मरीन को पश्चिम एशिया में तैनात किया जा रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं।