
छोटे परमाणु रिएक्टर से बदलेगी दुनिया की ऊर्जा नीति? (Img- Pinterest)
Washington: दुनियाभर में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा का नया रूप सामने आया है- माइक्रोरिएक्टर। अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकानों को राष्ट्रीय ग्रिड फेल होने या साइबर हमले की स्थिति में भी निर्बाध बिजली देने के लिए 2.2 अरब डॉलर (लगभग 18,000 करोड़ रुपये) के बजट से 5 स्थानों पर परमाणु माइक्रोरिएक्टर लगाने की योजना बनाई है।
माइक्रोरिएक्टर पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों का बेहद छोटा, सुरक्षित और पोर्टेबल रूप है। यह आमतौर पर 1 से 20 मेगावाट तक बिजली उत्पन्न करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) से गर्मी पैदा करता है, जिससे टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है। यह इतना छोटा होता है कि इसे ट्रक या कंटेनर में भरकर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है और इसे सालों तक दोबारा ईंधन (Refueling) देने की जरूरत नहीं पड़ती।
सैन्य ठिकाने और आधुनिक हथियार अब डेटा सेंटरों और एडवांस रडार सिस्टम पर निर्भर हैं, जिन्हें 24 घंटे भारी बिजली चाहिए। पारंपरिक नागरिक ग्रिड साइबर हमलों, तूफानों या युद्ध की स्थिति में ठप्प हो सकते हैं। बाहरी ग्रिड पर निर्भरता खत्म कर अपने सैन्य ठिकानों को 'ऊर्जा आत्मनिर्भर' बनाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है।
भारत के लिए भी यह तकनीक बेहद क्रांतिकारी साबित हो सकती है। लद्दाख, सियाचिन या अरुणाचल प्रदेश जैसे सुदूर सीमावर्ती सैन्य ठिकानों पर, जहां बिजली ग्रिड पहुंचाना मुश्किल है, वहां ये माइक्रोरिएक्टर वरदान बन सकते हैं। इसके अलावा, आपदा प्रभावित क्षेत्रों, द्वीपों और दूरदराज के औद्योगिक इलाकों में बिना किसी प्रदूषण और बिना रुकावट के 24x7 साफ बिजली देने में यह तकनीक भारत की मदद कर सकती है।
Location : Washington
Published : 27 August 2026, 11:02 AM IST
Topics : Defense Technology US defense US Army