
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता
Islamabad: शांति की उम्मीदों के बीच अचानक हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां बातचीत से ज्यादा धमकियों की गूंज सुनाई देने लगी है। इस्लामाबाद में होने वाली शान्ति वार्ता अब पटरी से उतरती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधि मंडल ने शान्ति वार्ता के प्रधानमंत्री से बात की वही अमेरिका ने धमकी दी है कि उसकी शर्तों पर बात नही हुई तो हम वापस लौट जाएंगे, जबकि ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अभी हमे अमेरिका पर भरोषा नहीं है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, जिसे लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस वार्ता के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance शनिवार (11 अप्रैल 2026) को इस्लामाबाद पहुंचे। बातचीत को लेकर दोनों देशों ने इसे अहम कूटनीतिक प्रयास बताया है, लेकिन हालात इतने आसान नहीं दिख रहे।
वार्ता से ठीक पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता, तो अमेरिका अब तक का सबसे घातक हमला करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी जहाजों पर अत्याधुनिक हथियार लोड किए जा रहे हैं और अगर समझौता नहीं हुआ तो उनका इस्तेमाल किया जाएगा।
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JD Vance ने पाकिस्तान रवाना होने से पहले कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करता है तो अमेरिका उसका स्वागत करेगा। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर ईरान “खेल” करने की कोशिश करता है तो वार्ता टीम बेहद सख्त रुख अपनाएगी।
दूसरी तरफ ईरान ने वार्ता से पहले ही अपनी शर्तें रख दी हैं। मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने कहा कि जब तक लेबनान में संघर्षविराम और ईरानी संपत्तियों से प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने भी कहा कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए और लेबनान को भी संघर्षविराम के दायरे में शामिल करना होगा।
ईरान ने रणनीतिक समुद्री मार्ग होरमुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर भी सहमति नहीं दी है। ईरान का कहना है कि वहां माइन्स (बारूदी सुरंगें) मौजूद हैं, जिससे स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
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इस बीच शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। व्हाइट हाउस के मुताबिक इस बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी शामिल थे। वहीं पाकिस्तान की ओर से गृह मंत्री मोहसिन नकवी और विदेश मंत्री इशाक डार मौजूद रहे।
दूसरी तरफ Israel ने हिजबुल्ला के साथ संभावित सीजफायर पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है। इजरायल का कहना है कि जब तक लेबनान पर हमले जारी हैं, तब तक कोई युद्धविराम संभव नहीं है।
Location : Islamabad
Published : 11 April 2026, 4:37 PM IST