‘झूठ बर्दाश्त नहीं करेंगे’: ट्रंप ने मीडिया पर चलाई कैंची, प्रेस की आजादी पर छिड़ी जंग

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन! CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से किया बैन। 'फेक न्यूज' के आरोप पर मीडिया का पलटवार, बताया प्रेस स्वतंत्रता पर गैर-कानूनी हमला। जानिए इस विवाद की पूरी कहानी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 September 2026, 8:21 AM IST

Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया जगत के खिलाफ एक बार फिर सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए देश के तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों CNN, MS NOW (पूर्व में MSNBC) और Politico को व्हाइट हाउस से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक तीखे पोस्ट के जरिए इस फैसले का ऐलान किया। उन्होंने इन आउटलेट्स पर अपने और अपने प्रशासन के खिलाफ लगातार 'फेक न्यूज' फैलाने, भ्रामक आंकड़े दिखाने और मनगढ़ंत खबरें गढ़ने का सीधा आरोप लगाया है।

झूठी कहानियां लिखने वालों को दूर रखने का अधिकार

ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रंप ने अपने सख्त फैसले को सही ठहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा, "मैं उन लोगों को अपने दफ्तर में नहीं देखना चाहता जो लगातार झूठ लिखते हैं। यदि कोई संस्था निष्पक्षता छोड़कर सिर्फ फिक्शन रिपोर्ट करती है, तो हमें उसे दूर रखने का पूरा अधिकार है।"

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले समय में गलत और पूर्वाग्रह से ग्रस्त खबरें दिखाने वाले कुछ अन्य मीडिया हाउसेस पर भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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मीडिया संस्थानों का पलटवार, बताया 'गैर-कानूनी हमला'

व्हाइट हाउस के इस फैसले के बाद अमेरिकी मीडिया जगत में जबरदस्त उबाल आ गया है। CNN ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए ट्रंप के इस एक्शन को अमेरिकी प्रेस स्वतंत्रता पर 'गैर-कानूनी हमला' करार दिया।

सीएनएन ने कहा कि अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन (First Amendment) के तहत उन्हें बिना किसी सरकारी दबाव या भय के निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने का पूरा हक है। वहीं, Politico ने भी साफ किया कि वे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे और प्रशासन पर बेबाक रिपोर्टिंग जारी रखेंगे।

अदालत में खिंच सकता है मामला, संविधान के उल्लंघन की चर्चा

ट्रंप का मीडिया से यह टकराव नया नहीं है। अपने पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने CNN के पत्रकार जिम अकोस्टा का प्रेस पास रद्द कर दिया था, जिसे बाद में संघीय अदालत के हस्तक्षेप के बाद बहाल करना पड़ा था। इसके अलावा 2025 में 'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) के खिलाफ लगाई गई पाबंदियां भी फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन हैं।

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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाइट हाउस से पत्रकारों को बाहर करने का यह फैसला अमेरिकी संविधान में दी गई प्रेस की आजादी की गारंटी के खिलाफ है, इसलिए इस फैसले का टिकना कोर्ट में काफी मुश्किल होगा।

Location :  Washington

Published :  19 September 2026, 8:21 AM IST