रूस की जेल में जिंदगी से निराश हो गए थे स्टीफन हबर्ड, बेटे को डर था-दोबारा नहीं देख पाऊंगा पिता का चेहरा

रूस की जेल से रिहा हुए 74 वर्षीय अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड हिरासत के दौरान जिंदगी से बेहद निराश हो गए थे। उनके बेटे जोसेफ कोलमैन ने बताया कि पिता की हालत देखकर उन्हें डर था कि वह शायद दोबारा उनसे नहीं मिल पाएंगे। जानिए हबर्ड की गिरफ्तारी, जेल में उनकी स्थिति और उनकी रिहाई को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा...

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 October 2026, 12:17 PM IST
New Delhi: रूस की जेल से रिहा हुए 74 वर्षीय अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड की आपबीती ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है। हिरासत के दौरान उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि बेटे जोसेफ कोलमैन को डर सताने लगा था कि शायद वह अपने पिता को दोबारा कभी नहीं देख पाएंगे। पिछले साल फोन पर हुई बातचीत में पिता की आवाज और उनकी निराशा ने बेटे को काफी परेशान कर दिया था। अब हबर्ड की रिहाई के बाद उनके बेटे ने पहली बार एक टेलीविजन इंटरव्यू में पिता के मुश्किल दौर और उनकी हालत के बारे में खुलकर बात की है।

पिता की हालत सुनकर डर गए थे बेटे

ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पादरी जोसेफ कोलमैन ने बुधवार को सीबीएस न्यूज को दिए अपने पहले टेलीविजन इंटरव्यू में बताया कि हिरासत के दौरान उनके पिता जिंदगी से बेहद निराश हो गए थे। कोलमैन के मुताबिक, पिता जिस परिस्थिति में रह रहे थे, उससे पूरी तरह थक चुके थे। उन्होंने कहा कि वह आत्महत्या के विचारों के बारे में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन बातचीत से ऐसा लगा कि पिता की निराशा उस दिशा में बढ़ रही थी। कोलमैन ने बताया कि रिहाई से पहले उनकी अपने पिता से करीब एक मिनट फोन पर बात हुई थी। इस बार पिता की आवाज मई 2025 में हुई पिछली बातचीत के मुकाबले बेहतर लगी। इससे परिवार को कुछ राहत मिली।

यूक्रेन में पकड़े गए थे 74 वर्षीय अमेरिकी नागरिक

स्टीफन हबर्ड अमेरिका के सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के कुछ समय बाद उन्हें यूक्रेन में पकड़ लिया था। उन पर यूक्रेन की ओर से लड़ने और भाड़े के लड़ाकों के लिए एक चौकी पर तैनात रहने का आरोप लगाया गया था। बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद उन्हें करीब सात साल जेल की सजा सुनाई गई। हालांकि, हबर्ड के परिवार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया। अमेरिकी सरकार ने भी उन्हें गलत तरीके से हिरासत में रखा गया अमेरिकी नागरिक माना था।

परिवार को भी नहीं पता था कहां कैद हैं हबर्ड

हबर्ड के वकील मार्टिन डी लुका के मुताबिक, फरवरी 2025 में जब उनकी कानूनी टीम ने मामला संभाला, तब परिवार और अमेरिकी दूतावास को भी ठीक से जानकारी नहीं थी कि हबर्ड को कहां रखा गया है। बाद में वकीलों ने उनका पता लगाया और उनसे मुलाकात की व्यवस्था की। साथ ही, जेल में भोजन और जरूरी सामान के लिए पैसे उपलब्ध कराने में भी मदद की।

ट्रंप ने रिहाई का श्रेय लिया, बाइडन पर साधा निशाना

स्टीफन हबर्ड की रिहाई की घोषणा 21 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पुतिन उनकी मांग पर हबर्ड को रिहा करने के लिए राजी हुए और इसके लिए किसी कैदी की अदला-बदली नहीं करनी पड़ी। ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस पर नए प्रतिबंध लागू नहीं करने के उनके फैसले ने रिहाई में भूमिका निभाई। व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर हबर्ड की रिहाई को लेकर पोस्ट करते हुए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन और डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा। पोस्ट में कहा गया कि स्टीफन हबर्ड और उनका परिवार रूस से घर लौट रहे हैं और यह काम बाइडन प्रशासन को बहुत पहले कर देना चाहिए था। इस बयान के जरिए ट्रंप ने रिहाई का श्रेय लेते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला बोला।

Location :  New Delhi

Published :  22 October 2026, 12:17 PM IST