“सेवा हमारी परंपरा का हिस्सा” कनाडा में मोहन भागवत बोले- भारत ने कभी मदद से पीछे नहीं हटाये कदम

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित कार्यक्रम में भारत की संस्कृति, सेवा भाव और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा जरूरत पड़ने पर दुनिया की मदद की है और सेवा करना उसकी परंपरा का हिस्सा है। जानिए मोहन भागवत के कनाडा दौरे और उनके संबोधन की पूरी जानकारी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 31 August 2026, 10:28 AM IST

New Delhi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया। अमेरिका यात्रा के बाद कनाडा पहुंचे भागवत ने कहा कि भारत ने हमेशा जरूरतमंद देशों और समाजों की मदद की है। उन्होंने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के सहायता के लिए हाथ बढ़ाना भारत की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है।

‘दुनिया में कहीं भी मदद मांगी गई तो भारत ने इनकार नहीं किया’

मोहन भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया में कहीं भारत से सहायता मांगी गई, देश ने कभी मना नहीं किया। उन्होंने कहा कि सेवा, सहयोग और मानवता भारत के मूल संस्कारों में शामिल हैं। इसी भावना के कारण कहा जाता है कि "अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।"

विविधता में एकता भारत की पहचान: भागवत

RSS प्रमुख ने भारतीय संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत विविधताओं को चुनौती नहीं बल्कि एकता का स्वरूप मानता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा जीव-जगत और प्रकृति की हर वस्तु को अपना मानने की सीख देती है।

उन्होंने कहा कि शरीर, भाषा, रंग और जीवनशैली में अंतर होने के बावजूद सभी मनुष्य मूल रूप से एक हैं। इसलिए दूसरों की सेवा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

भारत महाशक्ति बनने के लिए नहीं, दुनिया की सेवा के लिए आगे बढ़ा

तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत ने कभी महाशक्ति बनने के उद्देश्य से दुनिया में कदम नहीं बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि भारत ने ज्ञान, विज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यतागत मूल्यों के जरिए दुनिया की सेवा की है। उन्होंने प्राचीन भारतीय यात्रियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज मैक्सिको से साइबेरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंचे, लेकिन उनका उद्देश्य किसी देश पर कब्जा करना नहीं बल्कि ज्ञान का प्रसार करना था।

‘हिंदू’ शब्द किसी एक पूजा पद्धति तक सीमित नहीं

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू सभी विविधताओं का सम्मान करते हैं और सभी को स्वीकार करने की भावना रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा पीड़ितों और जरूरतमंदों को शरण दी है। भारत में मुस्लिम, ईसाई और यहूदी समुदाय सहित कई समुदाय अपनी परंपराओं के साथ रहते हैं।

कनाडा में भारतीय समुदाय ने किया स्वागत

इस कार्यक्रम का आयोजन कनाडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।

कार्यक्रम में कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद रहे। उन्होंने भारत-कनाडा संबंधों में आई नई सकारात्मकता का स्वागत किया। उनके संबोधन के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी लगाए।

भारतीय मूल के लोगों ने भागवत की यात्रा को बताया अहम

रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी कार्तिक त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने 15 वर्षों तक कनाडा की सेवा की और अपनी हिंदू पहचान पर गर्व किया। उन्होंने भागवत के विचारों को सुनने को महत्वपूर्ण अवसर बताया।

वहीं, भारतीय मूल के पथिक शुक्ला ने कहा कि दुनिया में जारी संघर्षों के बीच भागवत की यात्रा शांति और सकारात्मक संदेश देती है। हिंदू सभा मंदिर के पुजारी राजिंदर प्रसाद ने कहा कि यह यात्रा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना और भारतीय संस्कृति के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है।

Location :  New Delhi

Published :  31 August 2026, 10:28 AM IST