पेरिस में बना देश का पहला भव्य हिंदू मंदिर, प्राण प्रतिष्ठा में 40 देशों के दिग्गज शामिल, फ्रांस की धरती पर चमका सनातन का सूरज

फ्रांस की राजधानी पेरिस में देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा धूमधाम से संपन्न हुई। 5000 वर्गमीटर में फैले इस भव्य मंदिर में भारतीय वास्तुकला और फ्रांसीसी तकनीक का अद्भुत मेल दिखा। 40 देशों के मेहमानों की मौजूदगी रही।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 September 2026, 9:39 AM IST

Paris: पेरिस की धरती पर भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का एक नया सूर्योदय हुआ है। फ्रांस की राजधानी में देश के पहले पारंपरिक हिंदू मंदिर के द्वार आधिकारिक रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के गुरु महंतस्वामी महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा का भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर के गवाह बनने के लिए यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया समेत 40 से अधिक देशों से संत, भक्त और गणमान्य लोग पेरिस पहुंचे थे।

प्राचीन भारतीय वास्तुकला और आधुनिक फ्रांसीसी तकनीक का अद्भुत संगम

करीब 5000 वर्गमीटर के विशाल क्षेत्र में फैले इस भव्य परिसर को अनूठी शैली में तैयार किया गया है। मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के नियमों के तहत हुआ है, जिसमें फ्रांसीसी आधुनिक इंजीनियरिंग का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। इस पूरी संरचना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पत्थर भारत में तराशे गए और फिर फ्रांस में आधुनिक तकनीक के जरिए जोड़े गए। इस प्रकार यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' और 'बिल्ट इन फ्रांस' की भावना का एक अनूठा प्रतीक बन गया है। इसकी वास्तुकला दो हिस्सों में बंटी है, जिसमें ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर और निचले तल पर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक भव्य हवेली बनाई गई है।

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एफिल टावर के पास निकली ऐतिहासिक नगर यात्रा

मंदिर के लोकापर्ण से पहले 13 दिनों तक चले इस धार्मिक महोत्सव का समापन एक भव्य नगर यात्रा के साथ हुआ। पेरिस की सड़कों पर निकाली गई इस यात्रा में 14 सुसज्जित रथों पर हिंदू देवी-देवताओं की मनमोहक मूर्तियां सजाई गई थीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने सड़कों पर जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। यह भव्य शोभायात्रा पेरिस के प्रसिद्ध स्थलों जैसे एफिल टावर और एकोल मिलिटेर से गुजरते हुए प्लास द ला कॉनकॉर्ड तक पहुंची। इस आयोजन ने फ्रांस की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में भारतीय सनातन परंपरा का एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

पीएम मोदी का संदेश: भारत-फ्रांस संबंधों को मिली नई ऊर्जा

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना वीडियो संदेश जारी कर अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के मंदिरों के जरिए भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य पूरी दुनिया में प्रसारित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी ने फ्रांस आकर इन आध्यात्मिक संबंधों की नींव रखी थी। आज के समय में योग भी दोनों देशों के नागरिकों के बीच जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।

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उन्होंने आगे कहा कि यह नया मंदिर फ्रांस की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करेगा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर भारत और फ्रांस एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह साझेदारी दोनों देशों के पुराने राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का बलिदान और रोमा रोला द्वारा रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानंद पर लिखी गई कृतियां आज भी दोनों समाजों को करीब लाती हैं। अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह मंदिर आने वाले सदियों तक दोनों देशों के बीच सहयोग, संभावनाओं और सेवा प्रकल्पों का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

Location :  Paris

Published :  7 September 2026, 9:39 AM IST