
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने एक तरफ खुद को मध्यस्थ और शांति स्थापित करने वाला देश बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उसने ईरान के सैन्य विमानों को अपने रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर छिपने की अनुमति दी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद ईरान ने अपने कई महत्वपूर्ण सैन्य विमान पाकिस्तान भेज दिए थे। इनमें ईरानी वायुसेना का एक RC-130 टोही विमान भी शामिल बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपने बचे हुए सैन्य विमानों और संसाधनों को संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने इन विमानों को ऐसे एयरबेस पर रखा जो घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, ताकि किसी संभावित हमले की स्थिति में अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से बचे।
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इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिका में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ये रिपोर्ट सही साबित होती है, तो पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर नए सिरे से विचार करना होगा।
ग्राहम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कई अधिकारियों के पहले दिए गए इजरायल और अमेरिका विरोधी बयानों को देखते हुए उन्हें इस खबर पर ज्यादा हैरानी नहीं हुई। उनके इस बयान को पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए अमेरिकी सैन्य और आर्थिक समर्थन बनाए रखना कठिन हो सकता है।
हालांकि पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है और वहां गुप्त रूप से विदेशी सैन्य विमानों को छिपाना संभव नहीं है।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान से भी ईरानी नागरिक विमानों के पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। लेकिन तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन दावों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने विमान अफगानिस्तान भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, इन तमाम सफाइयों के बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे संकट में संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और सैन्य संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह ईरान और चीन को नाराज करने का जोखिम भी नहीं उठा सकता।
Location : New Delhi
Published : 12 May 2026, 8:41 AM IST
Topics : Iran Israel war Iran Pakistan Relations Iranian Military Aircraft Noor Khan Airbase Pakistan Controversy