
फ्रांस के हेनरी कागन और जापान के केन्सो सोई (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: विज्ञान की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले नोबेल पुरस्कारों की श्रृंखला में इस वर्ष रसायन विज्ञान के विजेताओं के नामों की घोषणा कर दी गई है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने बुधवार को स्टॉकहोम में वर्ष 2026 के लिए रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की, जिसके तहत यह प्रतिष्ठित सम्मान फ्रांस के प्रसिद्ध वैज्ञानिक हेनरी बी कागन और जापान के प्रख्यात वैज्ञानिक केन्सो सोई को संयुक्त रूप से प्रदान किया जाएगा। दोनों वैज्ञानिकों को यह सफलता असममित कार्बनिक संश्लेषण में नॉन-लीनियर प्रभावों और ऑटोकैटालिसिस की अभूतपूर्व खोज के लिए मिली है।
वर्ष 1901 से निरंतर प्रदान किए जा रहे नोबेल पुरस्कारों का इतिहास वैज्ञानिक उपलब्धियों के शिखर को छूता रहा है। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में यह इस साल की सबसे बड़ी घोषणा है। नोबेल समिति के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, हेनरी कागन और केन्सो सोई के शोध कार्यों ने असममित कार्बनिक संश्लेषण के क्षेत्र को समझने और उसे नियंत्रित करने की दिशा में पूरी तरह से नए रास्ते खोल दिए हैं। नोबेल के नियमों के तहत यह पुरस्कार अधिकतम तीन लोगों के बीच साझा किया जा सकता है और इस बार इस सूची में इन दो महान वैज्ञानिकों के नाम दर्ज हुए हैं।
‘तय नियमों के तहत कभी भी मिल सकते हैं राजनीतिक दल’, राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग का पलटवार
फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी कागन ने अपनी रिसर्च के दौरान रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने की एक बिल्कुल नई और अनोखी तकनीक विकसित की। उनकी इस खोज से वैज्ञानिकों को यह बड़ी सफलता मिली कि वे किसी भी रासायनिक प्रक्रिया में एक ही प्रकार की ‘मिरर इमेज’ यानी दर्पण प्रतिबिंब वाली संरचनाओं की मात्रा को पहले के मुकाबले कहीं अधिक मात्रा में उत्पन्न कर सकें।
उनकी इस क्रांतिकारी खोज ने विभिन्न उद्योगों को एक नई दिशा दी है। आज इस तकनीक का उपयोग जीवनरक्षक दवाओं, खाद्य फ्लेवर, विभिन्न सुगंधों और अत्याधुनिक नई सामग्रियों के निर्माण के लिए की जाने वाली जटिल रासायनिक प्रतिक्रियाओं को विकसित करने में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
दूसरी ओर, जापान के वैज्ञानिक केन्सो सोई ने रसायन विज्ञान के इतिहास में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसे विज्ञान के सबसे उल्लेखनीय प्रयोगों में शुमार किया जाता है। उन्होंने एक ऐसी पहली रासायनिक प्रतिक्रिया को तैयार करने में सफलता पाई जिसमें संभावित दो मिरर इमेज में से केवल और केवल एक ही मिरर इमेज का निर्माण होता है।
नोबेल कमेटी ने इस खोज के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जैविक जीवन की उत्पत्ति को यदि छोड़ दिया जाए, तो इससे पहले प्रकृति में भी इस तरह का कोई दूसरा उदाहरण देखने को नहीं मिला था। उनके इस असाधारण प्रयोग को आज दुनिया भर में ‘सोई रिएक्शन’ के नाम से जाना जाता है।
Delhi Police ACP AI Video Case: CJP का समर्थक नदीम गिरफ्तार, एआई से बनाई थी फर्जी रील
इस वर्ष के नोबेल पुरस्कार सत्र की शुरुआत 5 अक्टूबर को मेडिसिन यानी चिकित्सा के क्षेत्र में विजेताओं के ऐलान के साथ हुई थी। इसके अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को भौतिकी (फिजिक्स) के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई थी और अब रसायन विज्ञान के विजेताओं के नाम सामने आने के बाद विज्ञान प्रेमियों की निगाहें आगे आने वाली अन्य श्रेणियों पर टिकी हुई हैं। हेनरी कागन और केन्सो सोई की इन खोजों ने न केवल अकादमिक जगत को समृद्ध किया है, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाने वाली तकनीकों के द्वार भी खोल दिए हैं।
Location : New Delhi
Published : 7 October 2026, 4:15 PM IST