मध्य पूर्व संकट के बीच पीएम मोदी ने इजरायल के पीएम नेतन्याहू और UAE राष्ट्रपति से बातचीत की। CCS बैठक में भारत ने सुरक्षा, तेल कीमतों और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की स्थिति की समीक्षा की। डाइनामाइट न्यूज़ पर जानिये अब तब के वॉर संबंधित लेटेस्ट अपडेट।

ईरान-इजरायल वॉर के लेटेस्ट अपडेट
New Delhi: ईरान और इजरायल के युद्ध ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र में जारी संघर्ष को जल्द रोकने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का समर्थक है और हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
UAE) के राष्ट्रपति से भी की बात
प्रधानमंत्री मोदी ने नेतन्याहू के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बात की। यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने पूरा समर्थन और एकजुटता जताई। भारत और खाड़ी देशों के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, ऐसे में यह संवाद अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित आर्थिक प्रभावों की गहन समीक्षा की गई।
इज़राइल-ईरान युद्ध से जुड़े लेटेस्ट अपडेट#IsraelIranConflict #BreakingNews #MiddleEastTensions pic.twitter.com/U2drvhjmUD
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 2, 2026
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यूएई, कुवैत, कतर और सऊदी अरब में लाखों भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। बढ़ते तनाव के बीच कई परिवारों और छात्रों ने सरकार से सुरक्षा और संभावित निकासी की मांग की है। जरूरत पड़ने पर विशेष उड़ानों और आपातकालीन सहायता की योजना तैयार रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
मध्य पूर्व में संघर्ष और तीव्र हो गया है। इजरायल की ओर से किए गए हवाई हमलों में आतंकी संगठन हिजबुल्ला का नेता मोहम्मद राद मारा गया। इसी बीच ब्रिटेन ने अमेरिका को गल्फ़ क्षेत्र में अपने सैन्य बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, जिससे लड़ाई की रणनीति और भी व्यापक हो सकती है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
मध्य पूर्व में तनाव का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
तेल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई दर पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति लंबी खिंचती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं और कई देशों की भूमिका भी चर्चा में है। इससे व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
Iran Israel War: महायुद्ध के बीच इज़राइल का एक और बड़ा दावा, जानिये इस बार क्या बोला…