अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान का शासन फिलहाल सुरक्षित है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में सत्ता पर नियंत्रण अभी भी मजबूत बना हुआ है। वहीं तेल कीमतों और राजनीतिक दबाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म करने के संकेत दिए हैं।

ट्रंप पर बढ़ा दबाव (Image Source: Internet)
New Delhi: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नई रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बमबारी और युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद ईरान में शासन के पतन का फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी इंटेलिजेंस की कई रिपोर्टों में यह निष्कर्ष निकला है कि ईरानी शासन अभी भी मजबूत स्थिति में है। देश के भीतर सरकार का नियंत्रण बरकरार है और निकट भविष्य में सत्ता परिवर्तन की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले करीब दो सप्ताह से जारी हमलों के बावजूद ईरान का राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह नहीं टूटा है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अभी भी स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं।
युद्ध की शुरुआत के दौरान 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। हालांकि इस घटना के बाद भी देश के धार्मिक और सैन्य नेतृत्व में एकजुटता देखने को मिली है। सूत्रों के मुताबिक इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और अंतरिम नेतृत्व ने मिलकर देश की सत्ता को संभाल लिया है।
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इसके बाद खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया, जिससे कट्टरपंथी गुटों की पकड़ और मजबूत हो गई है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के भीतर सरकारी संस्थान अभी भी सक्रिय हैं और जनता पर शासन का नियंत्रण बना हुआ है। यही वजह है कि मौजूदा हालात के बावजूद शासन के गिरने की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
इस बीच अमेरिका के भीतर भी युद्ध को लेकर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि सैन्य अभियान जल्द समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने अमेरिका के इस सैन्य अभियान को 2003 के बाद का सबसे बड़ा ऑपरेशन बताया है और कहा है कि "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" अपने तय समय से आगे चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान के नेता समझौते के लिए तैयार नहीं हुए तो समाधान निकालना मुश्किल हो सकता है।
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हालांकि उन्होंने ईरान से "अनकंडीशनल सरेंडर" की मांग भी दोहराई है। इसके बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना है, न कि शासन परिवर्तन करना।
सूत्रों का कहना है कि ईरान के भीतर हालात अभी भी अस्थिर हैं और स्थिति तेजी से बदल सकती है। लेकिन फिलहाल आईआरजीसी और नए नेतृत्व ने सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखा है, जिससे निकट भविष्य में शासन के गिरने की संभावना कम मानी जा रही है।