Iran Israel War: ईरान के कई शहरों में न्यूक्लियर रेडिएशन फैलने का खतरा, किन साइट्स पर ज्यादा जोखिम?

ईरान में सैन्य तनाव के बीच न्यूक्लियर रेडिएशन खतरे की चर्चा तेज है। IAEA ने संभावित जोखिम की चेतावनी दी है, लेकिन अभी तक किसी भी साइट से रेडिएशन लीक की पुष्टि नहीं हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक स्थिति गंभीर जरूर है, पर फिलहाल नियंत्रण में है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 2 March 2026, 5:29 PM IST

New Delhi: ईरान में संभावित न्यूक्लियर रेडिएशन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। 2 मार्च 2026 को International Atomic Energy Agency (IAEA) के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में चेतावनी दी कि वेस्ट एशिया में जारी सैन्य गतिविधियों से न्यूक्लियर सेफ्टी के लिए जोखिम बढ़ गया है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अब तक ईरान के किसी भी परमाणु स्थल से रेडिएशन लीक की पुष्टि नहीं हुई है।

खतरा संभावित

IAEA के अनुसार ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर फिलहाल किसी रेडियोलॉजिकल रिलीज (रेडिएशन लीक) का प्रमाण नहीं मिला है। पड़ोसी देशों में भी बैकग्राउंड रेडिएशन सामान्य स्तर पर है। एजेंसी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और ईरानी अधिकारियों के संपर्क में रहने की कोशिश कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जोखिम “संभावित” है, यानी अगर संवेदनशील साइट्स पर बड़ा हमला होता है तो स्थिति बदल सकती है। अभी तक किसी बड़े परमाणु रिएक्टर या फ्यूल साइकिल सुविधा को गंभीर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

किन साइट्स पर ज्यादा जोखिम?

IAEA और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की कुछ प्रमुख परमाणु साइट्स पर संभावित खतरे की चर्चा है:

नतांज (Natanz): यह देश का सबसे बड़ा यूरेनियम संवर्धन केंद्र है। यहां सेंट्रीफ्यूज मशीनें लगी हैं। यदि हमला होता है तो यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF6) गैस लीक हो सकती है, जो जहरीली और हल्की रेडियोएक्टिव होती है।

फोर्डो (Fordow): पहाड़ के अंदर गहरे बंकर में स्थित यह साइट हाईली एनरिच्ड यूरेनियम के लिए जानी जाती है।

इस्फहान (Isfahan): यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन से जुड़ा केंद्र, जहां संवर्धित सामग्री स्टोर की जाती है।

अराक (Arak): हेवी वॉटर रिएक्टर साइट।

परचिन (Parchin): सैन्य अनुसंधान से जुड़ा स्थल, जहां अतीत में परमाणु गतिविधियों के संदेह रहे हैं।

बुशहर (Bushehr): देश का एकमात्र ऑपरेशनल न्यूक्लियर पावर प्लांट।

IAEA का कहना है कि इन साइट्स पर अब तक किसी हमले या रेडिएशन बढ़ोतरी की पुष्टि नहीं हुई है।

क्या अमेरिका-इजरायल के हमलों से बढ़ा खतरा?

अमेरिका और इजरायल ने हाल के दिनों में ईरान में सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया है। हालांकि IAEA के अनुसार किसी भी प्रमुख न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन—जैसे नतांज, फोर्डो, इस्फहान या बुशहर पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान ने कुछ स्थलों पर हमले का दावा किया है, लेकिन स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सीमित है। IAEA ने यह जरूर कहा है कि सैन्य हमलों के माहौल में न्यूक्लियर सेफ्टी का जोखिम स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, क्योंकि संवेदनशील ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

रेडिएशन क्यों हो सकता है और कितना बड़ा होगा असर?

यदि संवर्धन केंद्रों पर हमला होता है और सेंट्रीफ्यूज टूटते हैं, तो UF6 गैस का रिसाव हो सकता है। यह गैस जहरीली है और सांस या संपर्क के जरिए नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि यह चेर्नोबिल जैसे बड़े रिएक्टर मेल्टडाउन जैसा परिदृश्य नहीं होगा, क्योंकि ईरान के अधिकांश विवादित स्थल पावर रिएक्टर नहीं हैं।

सबसे गंभीर स्थिति तब हो सकती है जब किसी सक्रिय पावर प्लांट, जैसे बुशहर, को भारी नुकसान पहुंचे। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है।

IAEA का आकलन है कि यदि रेडियोलॉजिकल रिलीज होती भी है, तो उसका प्रभाव संभवतः स्थानीय स्तर तक सीमित रह सकता है। बड़े पैमाने पर निकासी की नौबत तभी आएगी जब व्यापक संरचनात्मक क्षति हो।

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Published : 
  • 2 March 2026, 5:29 PM IST