ईरान के अली लारिजानी की मौत के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हर बूंद का हिसाब लिया जाएगा। इजरायल के हमले के दावे के बाद अब ईरान ने भी मौत की पुष्टि कर दी है, जिससे मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ सकते हैं।

लारिजानी की हत्या पर ईरान का बड़ा ऐलान (Image Source: Google)
New Delhi: ईरान के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस घटना पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि खून की एक-एक बूंद की कीमत चुकानी होगी। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं।
कुछ दिन पहले इजरायल ने दावा किया था कि उसने एक हमले में अली लारिजानी को मार गिराया है। शुरुआत में इस पर सस्पेंस बना रहा, लेकिन बाद में ईरान ने भी आधिकारिक तौर पर लारिजानी की मौत की पुष्टि कर दी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने बयान में कहा कि लारिजानी की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी और दोषियों को इसका अंजाम भुगतना होगा। उन्होंने इस घटना को आतंक का कृत्य बताते हुए कहा कि इससे दुश्मनों की नीयत साफ होती है, लेकिन इससे ईरान का संकल्प और मजबूत होगा। खामेनेई ने दोहराया कि न्याय जरूर होगा और ईरान अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
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मोजतबा खामेनेई के इस बयान के बाद ईरान की ओर से किसी बड़े जवाबी कदम की संभावना बढ़ गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
अली लारिजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र में एक बेहद प्रभावशाली चेहरा थे। उन्होंने करीब 10 वर्षों तक देश के सरकारी ब्रॉडकास्टर का नेतृत्व किया और बाद में सुप्रीम लीडर के सुरक्षा सलाहकार बने। 2005 में उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया गया, जो देश की सबसे अहम सुरक्षा संस्थाओं में से एक है।
इसी दौरान उन्हें ईरान का मुख्य परमाणु वार्ताकार भी बनाया गया, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों के प्रस्तावों का विरोध करते हुए देश की नीतियों को मजबूती से आगे बढ़ाया।
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लारिजानी की मौत ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका मानी जा रही है। उनका प्रभाव केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि रूस और चीन जैसे देशों तक फैला हुआ था। यही वजह है कि उन्हें ईरानी नेतृत्व की रीढ़ माना जाता था। यह घटना 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान के लिए सबसे बड़ा नुकसान हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।