US Tariff: ट्रंप के यू-टर्न से भारत समेत 5 देशों को राहत, रूसी तेल खरीदने पर नहीं लगेगा टैरिफ

US Tariff on India: डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े नए कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों पर छूट दी है। इससे रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा फिलहाल टला है। जानिए फैसले का भारत और ऊर्जा बाजार पर क्या असर होगा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 17 October 2026, 9:19 AM IST
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Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत पांच देशों को रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर बड़ी राहत दी है। ट्रंप ने नए कानून के तहत रूसी ऊर्जा खरीद पर लगाए जाने वाले 100 प्रतिशत तक के टैरिफ से छूट देने का फैसला किया है। यह राहत ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत दी गई है।

अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम को राष्ट्रीय हित में बताया है। इससे भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर तत्काल टैरिफ का खतरा टल गया है। हालांकि, अमेरिका भविष्य में इस फैसले की समीक्षा कर सकता है।

किस कानून के तहत लगाया जा सकता था टैरिफ?

सितंबर में लागू हुए लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के तहत अमेरिकी प्रशासन को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर आर्थिक दबाव बनाने के अधिकार दिए गए हैं। इसमें भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान भी शामिल है।

यह शुल्क अपने आप लागू नहीं होना था, बल्कि इसके लिए अमेरिकी प्रशासन को निर्णय लेना था। ट्रंप ने अब कानून में मौजूद छूट के प्रावधान का इस्तेमाल किया है।

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रूस से डीजल खरीदने के समझौते का क्या है संबंध?

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन ने रूस से डीजल की आपूर्ति से जुड़े समझौते की भी घोषणा की है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस शुरुआती खेप में 3 लाख टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराने और आने वाले महीनों में अतिरिक्त आपूर्ति करने पर सहमत हुआ है।

इस कदम का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है। हालांकि, विश्लेषकों ने इसकी वास्तविक कीमतों पर पड़ने वाली राहत को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

भारत के लिए रूसी तेल क्यों अहम है?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क लगने की स्थिति में व्यापार और ऊर्जा लागत पर असर पड़ सकता था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत थी। भारत का कहना है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बाजार की उपलब्धता, कीमतों और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

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क्या भारत पर टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया?

फिलहाल अमेरिकी आदेश से नए कानून के तहत प्रस्तावित शुल्कों पर राहत मिली है, लेकिन स्थिति को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। आदेश में इन छूटों को भविष्य में बदले जाने की गुंजाइश रखी गई है और अमेरिकी प्रशासन को रूस से ऊर्जा खरीद की निगरानी जारी रखने का निर्देश दिया गया है। इसलिए भारत के लिए यह तत्काल राहत जरूर है, लेकिन आगे की स्थिति अमेरिका के नीतिगत फैसलों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी।

Location :  Washington

Published :  17 October 2026, 9:19 AM IST

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