ईरान ने भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की दी अनुमति, पढ़िए पूरी खबर

भारत और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय झंडाधारी टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची की बातचीत के बाद दो भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरते देखे गए।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 12 March 2026, 11:39 AM IST

New Delhi: भारत और ईरान के बीच हुई उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत का असर अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई चर्चा के बाद ईरान ने भारत-झंडाधारी टैंकरों को Strait of Hormuz से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई देशों के जहाजों को हमलों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

दो भारतीय टैंकर सुरक्षित मार्ग से गुजरे

कूटनीतिक सहमति बनने के तुरंत बाद दो भारतीय टैंकर ‘Pushpak’ और ‘Parimal’ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरते हुए देखे गए। यह घटनाक्रम उस समय बेहद अहम माना जा रहा है जब इस क्षेत्र में कई विदेशी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को भारत-ईरान संबंधों में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत

भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी बातचीत के बाद ईरान ने भारत-झंडाधारी जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का फैसला लिया।

होर्मुज की रणनीतिक अहमियत

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष के कारण इस मार्ग पर खतरे बढ़ गए हैं। कई विदेशी जहाजों को हमलों और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

ईरान का सख्त रुख

ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हित वाले तेल को इस मार्ग से गुजरने नहीं देगा। ईरान का कहना है कि वह अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने से ईरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

भारत को कूटनीति से मिली राहत

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और संभावित नाकेबंदी के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय पहल की। इसी प्रयास के तहत भारत और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत हुई, जिसके बाद भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिलने की राह खुली।

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  • 12 March 2026, 11:39 AM IST