संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाई दिव्यांगों के अधिकारों की आवाज, आपदा के समय भी समान अवसर देने पर जोर

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तीकरण का मुद्दा उठाया। संजय कुमार झा ने समान अवसर, नीतिगत भागीदारी और आपदा के समय सुरक्षित राहत व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने कल्याणकारी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर अधिकार आधारित समावेशी व्यवस्था बनाने का संदेश दिया।

Post Published By: Prashant Sharma
Updated : 24 October 2026, 11:57 AM IST

New York: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके सशक्तीकरण को लेकर एक अहम संदेश दिया है। भारत ने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें समान अधिकार, बेहतर अवसर और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी भी मिलनी चाहिए। इस दौरान आपदा और मानवीय संकट के समय दिव्यांगजनों की सुरक्षा को भी प्रमुखता से उठाया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रखी अपनी बात

संयुक्त राष्ट्र में आयोजित संवाद के दौरान परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने समावेशी वैश्विक व्यवस्था बनाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि दिव्यांगजनों को समाज के हर क्षेत्र में समान अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की जरूरतों को नीतियां बनाते समय ध्यान में रखना जरूरी है। शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

संजय कुमार झा ने दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर भारत का पक्ष रखा (Source: X)

कल्याण से आगे बढ़कर सशक्तीकरण पर जोर

भारत ने दिव्यांगजनों के प्रति नजरिये में बदलाव की जरूरत बताई। केवल सहायता या कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित रहने के बजाय उन्हें अधिकारों के आधार पर सशक्त बनाना जरूरी है।

इसका मतलब है कि दिव्यांगजनों को अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने, सार्वजनिक नीतियों में अपनी बात रखने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिले। समावेशी व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब दिव्यांगजनों की आवाज को भी निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित स्थान दिया जाएगा।

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आपदा के समय दिव्यांगजनों की सुरक्षा क्यों जरूरी?

भारत ने मानवीय संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दिव्यांगजनों की जरूरतों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। आपातकालीन परिस्थितियों में राहत और बचाव की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसका लाभ दिव्यांगजन भी आसानी से उठा सकें।

इसके लिए सुलभ आपातकालीन सूचनाएं, सुरक्षित निकासी की व्यवस्था और दिव्यांगजनों की जरूरतों के अनुरूप राहत शिविर जरूरी हैं। आपदा प्रबंधन की योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने से संकट के समय होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकता है।

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भारत के कानून और वैश्विक प्रतिबद्धता

भारत में दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 लागू है। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के अधिकारों, समान अवसरों और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCRPD) भी वैश्विक स्तर पर समानता और समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत का संदेश स्पष्ट है कि दिव्यांगजनों को समाज का सक्रिय और समान अधिकारों वाला हिस्सा बनाने के लिए केवल योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए सुलभ व्यवस्था, प्रभावी नीतियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

Location :  New York

Published :  24 October 2026, 11:57 AM IST