संयुक्त राष्ट्र में गरजा भारत: आतंकवाद के राजनीतिकरण पर लगाई फटकार, UNSC सुधारों के लिए मांगी समय-सीमा

संयुक्त राष्ट्र में भारत की कार्यवाहक प्रतिनिधि योजना पटेल ने सुरक्षा परिषद के कामकाज पर सवाल उठाते हुए 1945 के पुराने ढांचे में बड़े बदलाव की मांग की। भारत ने UNSC में स्थायी सीटों के विस्तार, आतंकवाद के राजनीतिकरण को रोकने और शांति अभियानों में योगदान देने वाले देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 August 2026, 11:33 AM IST

New Delhi: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर मजबूत रुख अपनाया है। भारत का मानना ​​है कि 1945 में बनी सुरक्षा परिषद की संरचना आज की वैश्विक हकीकत से मेल नहीं खाती है। परिषद में विकासशील देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत ने आतंकवाद के मुद्दे के राजनीतिकरण को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया।

80 साल पुराने सिस्टम में बड़े बदलावों की जरूरत

संयुक्त राष्ट्र में भारत की कार्यवाहक प्रतिनिधि योजना पटेल ने सुरक्षा परिषद के कामकाज के तरीकों पर खुली बहस के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद से दुनिया काफी बदल गई है, इसलिए उस समय बनाए गए सिस्टम को हमेशा के लिए बनाए नहीं रखा जा सकता। भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की। इससे विकासशील देशों को बड़े वैश्विक फैसलों पर अपनी बात रखने के ज्यादा मौके मिलेंगे।

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सुधार के लिए समय-सीमा तय करना

भारत ने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में सुधार सिर्फ चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इस प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट लक्ष्य तय करना जरूरी है। सुधार की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है।

आतंकवाद का राजनीतिकरण नहीं

भारत ने आतंकवाद पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उसने कहा कि सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल आतंकवादियों को बचाने या उन्हें प्रतिबंधों की सूची से हटाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत के अनुसार व्यक्तियों या संगठनों को आतंकवादी के तौर पर सूची में शामिल करने या हटाने के फैसले ठोस सबूतों और पारदर्शी नियमों पर आधारित होने चाहिए न कि राजनीतिक फायदे-नुकसान पर।

कमिटी में नियुक्तियों में देरी पर चिंता

भारत ने आतंकवाद-रोधी कमिटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी पर चिंता जताई। उसने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण ये नियुक्तियां लगभग आठ महीनों से रुकी हुई हैं। भारत ने ऐसे मामलों के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की।

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शांति अभियानों में सैनिक भेजने वाले देशों की भागीदारी

भारत ने उन देशों की बड़ी भूमिका की वकालत की जो संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सैनिक और पुलिसकर्मी भेजते हैं। भारत का मानना ​​है कि इन अभियानों में सीधे योगदान देने वाले देशों को बड़े फैसले लेने और संसाधनों की योजना बनाने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

Location :  New Delhi

Published :  20 August 2026, 11:33 AM IST